वर्ष का पहला आंशिक सूर्यग्रहण

आंशिक सूर्यग्रहण
Image caption पूरी दुनिया देख पाएगी ये अदभुद नज़ारा

मंगलवार को वर्ष 2011 का पहला आंशिक सूर्यग्रहण दिखाई देगा.

पृथ्वी पर कई जगह रहने वाले करोड़ों लोग चांद को सूरज का एक बड़ा हिस्सा 'खाते' देख पाएंगे.

उत्तर अफ्रीका और यूरोप में तो ये नज़ारा पौ फटते ही नज़र आएगा पर मध्य रुस और पश्चिमोत्तर चीन में लोगों को ये नज़ारा सूर्यास्त के वक़्त दिखेगा.

भारत में, दिल्लीवासी तीन बजकर बारह मिनट पर ये नज़ारा देख पाएंगे.

पूर्वोत्तर स्वीडन में ग्रीनीच मानक समय अनुसार सुबह आठ बजकर पचास मिनट पर स्केलेफ्टी शहर के पास नज़र आएगा. यहां चांद सूर्य के कुल व्यास का 90 प्रतिशत हिस्सा ढँक देगा.

आसमान में सितारों को ताकने के शौकीनों के लिए अच्छी ख़बर ये है कि दोनों चांद और सूरज काफी उंचाई पर होंगे और क्षितिज पर नज़र आएंगे.

'सावधानी बरतें'

पर जैसे कि हर सूर्य ग्रहण के साथ होता है जनता को पूरी सावधानी बरतने को कहा जा रहा है.

सूर्य की तेज़ रोशनी को केवल बचाव करने वाले चश्मों से ही देखा जाना चाहिए या फिर सोलर टेलीस्कोप से या फिर सूई की छेद वाले प्रोजेक्टर प्रणाली से.

कई जगह खगोलशास्त्र के प्रेमी और इस क्षेत्र में विशेषज्ञ इस भौगोलिक प्रक्रिया को देखने का इंतज़ाम करेंगे.

आंशिक सूर्यग्रहण तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा धरती से एक के पीछे एक नज़र नहीं आते और जब चांद की छाया सूर्य के सामने से निकलती है पर धरती पर टिकती नहीं.

पर चांद और सूरज के आमने सामने आने से सूर्य की रोशनी थोड़ी कम नज़र आती है. ये इस पर भी निर्भर करता है कि चांद का कितना बड़ा हिस्सा सूरज के सामने आता है और उसे छुपा पाता है.

इस साल तीन और सूर्य ग्रहण होंगे पर यूरोप में रहने वालों के लिए ये अहम है क्योंकि इतना ढंका हुआ सूर्य उन्हें 20 मार्च 2015 तक देखने को नहीं मिलेगा.

अगला सूर्यग्रहण नवंबर 2013 में दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में नज़र आएगा.

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