'आबादी का बोझ बड़ा ख़तरा'

भीड़
Image caption कई देशों में अनाज का भंडारण एक बड़ी समस्या है.

दुनिया की आबादी पर किए गए एक बड़े अध्ययन से पता चला है कि 21वीं सदी में बढ़ती जनसंख्या जलवायु परिवर्तन से भी बड़ी चुनौती साबित होने वाली है.

ब्रिटेन के 'इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैकेनिकल इंजीनियरिंग' की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि तेज़ी से बढ़ती आबादी के कारण करोड़ों लोग भूख, प्यास और ऊर्जा की कमी का सामना कर सकते हैं.

रिपोर्ट के अनुसार के विकासशील देशों में लगातार बढ़ती जनसंख्या इस सदी की सबसे बड़ी चुनौती है और इससे उत्पन्न होने वाला ख़तरा जलवायु परिवर्तन से कहीं अधिक बड़ा है.

अध्ययन के अनुसार आने वाले छह दशकों में दुनिया की आबादी वर्तमान क़रीब सात सौ करोड़ से बढ़ कर लगभग साढ़े नौ सौ करोड़ हो जाएगी.

रिपोर्ट के मुताबिक इस आबादी के लिए संसाधन जुटाना और उनका संरक्षण करना आसान नहीं होगा.

'समाधान भी हैं'

Image caption विकासशील देशों में जनसंख्या का दवाब अधिक होने वाला है.

अध्ययन के मुताबिक इस चुनौती से निपटने के लिए तुरंत ही बारिश के पानी को संरक्षित करने और अनाज के भंडारण को दुरुस्त करने के लिए तकनीकी समाधान खोजने होंगे.

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि अफ़्रीका में क़रीब आधा कृषि उत्पाद बाज़ार तक पहुंचते-पहुंचते क्षतिग्रस्त हो जाता है.

इस रिपोर्ट को दुनिया भर के 70 इंजीनियरों ने तैयार किया है.

आबादी की समस्या का गंभीर आकलन करने के बाद रिपोर्ट इस बात पर भी ज़ोर देती है कि स्थिति से निपटने के लिए तकनीक उपलब्ध है बशर्ते राजनीति और अर्थव्यवस्था की मजबूरिया इसके आड़े ना आएं.

बीबीसी के पर्यावरण विश्लेष्क रोजर हैराबिन के मुताबिक रिपोर्ट में व्यक्त किए गए कुछ विचारों का स्वागत हो रहा है लेकिन कुछ की आलोचना भी हो रही है.

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