हैज़े की सस्ती दवा का परीक्षण

Image caption हेती को भी हैजे के प्रकोप का सामना करना पड़ा है.

बांग्लादेश में स्वास्थ्य अधिकारी गुरुवार से हैज़े की सस्ती दवा के सबसे बड़े परीक्षणों की शुरुआत कर रहे हैं. यदि ये परीक्षण सफल रहता है तो हज़ारों लोगों की जान बचाई जा सकेगी.

बांग्लादेश की राजधानी ढाका के बाहरी इलाके में होने वाले इस परीक्षण में लगभग ढाई लाख लोग हिस्सा लेंगे.

अधिकारियों का कहना है कि अगर ये योजना सफल रहती है तो इन दवाओं को अन्य देशों में भी अपनाया जा सकेगा, जहाँ हैज़ा बड़ी समस्या है.

बांग्लादेश में हर साल हैज़े का प्रकोप होता है. मानसून और बाढ़ के मौसम में सैकड़ों लोग हैज़े की वजह से मारे जाते है.

मुँह से ली जाने वाली हैज़े की दवा इस गरीब देश के लाखों लोगों के लिए काफ़ी मँहगी मानी जाती है.

इस नए कदम का मकसद मुँह से ली जाने वाली एक सस्ती दवा का परीक्षण करना है, जो कि मौजूदा दवा के मूल्य से दस गुना तक सस्ती है.

इस परीक्षण में ढाई लाख लोग हिस्सा लेगें, जिनमें से दो तिहाई लोगों को भारत में निर्मित दवा दी जाएगी और बाकि बचे लोगों को नई दवा दी जाएगी. इसके बाद अगले चार साल तक इन दो समुहों की निगरानी की जाएगी.

इस परियोजना में शामिल वैज्ञानिक फ़िरदौसी क़ादरी ने कहा, ''ये परीक्षण दिखाएगा कि हम उस जनता को ये दवा मुहैया करवा सकते है जिनको इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है. साथ ही ये परीक्षण मौजूदा दवाओं के लिए भी एक परीक्षा होगी.''

इस परीक्षण का एक मकसद ये भी है कि बेहतर तौर पर ये पता लगाया जाए कि हैज़े की वजह से कितने लोगों की मौत होती है.

यदि ये कार्यक्रम सफल होता है तो अधिकारी इस दवा का पूरे देश में इस्तेमाल करेंगे.

हैज़े के प्रकोप से जूझने वाले हेती जैसे कई और विकासशील देशों की भी इस परीक्षण के परिणामों में रुची हो सकती है.

लेकिन समीक्षकों का मानना है कि आधुनिक दवाईयाँ हैज़े के खिलाफ़ लबें समय सक सुरक्षा प्रदान नहीं करती.

जानकारों का ये भी मानना है कि बड़े स्तर पर टीकाकरण के अलावा पानी और सफ़ाई व्यवस्था के ढांचे को भी विकसित करना होगा जो कि हैज़े के प्रकोप से बचने के लिए कारगर हो सकता है.

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