तेज़ी से पिघल रहे हैं चिली के ग्लेशियर

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Image caption अध्ययन में शामिल पैटागोनिया का सैन रफ़ाएल ग्लेशियर

पर्वतों के ग्लेशियर अब जिस तेज़ी से पिघल रहे हैं उतने पिछले 350 सालों में नहीं पिघले.

एबरिस्टविथ, ऐक्ज़ेटर और स्टॉकहोम विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के लिए लम्बे काल चक्र पर नज़र डाली.

उन्होने पिछले ‘लघु हिमयुग’ से लेकर अब तक चिली और अर्जनटीना के 270 ग्लेशियरों में हुए परिवर्तनों का मानचित्र तैयार किया.

इस अध्ययन से पता चलता है कि पिछले 30 सालों में इन ग्लेशियरों का 10 से 100 गुना परिमाण कम हो गया है.

ये नया शोध ‘नेचर जियोसाइंस’ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है.

ऐंडीज़ के ग्लेशियर

ये ग्लेशियर चिली और अर्जनटीना की सीमा पर ऐंडीज़ पर्वतमाला में फैले हुए हैं.

उत्तरी हिमक्षेत्र कोई 200 किलोमीटर तक फैला है और 4200 वर्ग किलोमीटर की सतह को ढकता है जबकि दक्षिणी हिमक्षेत्र 350 किलोमीटर लम्बा है और 13,000 वर्ग किलोमीटर को ढकता है.

शोध के प्रमुख लेखक प्रोफ़ैसर नील ग्लैसर का कहना है, “समुद्र के जल स्तर में पर्वतीय ग्लेशियरों के योगदान के पिछले अनुमान बहुत कम समय पर आधारित हैं”.

“वो केवल पिछले 30 साल पर आधारित हैं जब ग्लेशियर के परिमाण में हुए परिवर्तन को मापने के लिए उपग्रहों से ली गई तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया”.

“हमने एक नई विधि का इस्तेमाल किया जो हमें लम्बे काल-चक्र का आकलन करने देता है”.

प्रोफ़ैसर नील ग्लैसर ने कहा, “हम जानते थे कि दक्षिण अमरीका में ग्लेशियर लघु हिमयुग में कहीं अधिक विशाल थे. इसलिए हमने उस समय का मानचित्र बनाया और फिर ये गणना की कि कितनी बर्फ कम हुई है”.

उनकी गणना से बताती है कि हाल के वर्षों में ये पर्वतीय ग्लेशियर बड़ी तेज़ी से पिघले हैं इसलिए समुद्र का जल स्तर बढ़ा है.

ऐक्ज़ैटर विश्वविद्यालय के डॉ स्टीवन हैरिसन ने कहा, “ये शोध इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि औद्योगिक क्रांति के चरम के बाद से पहली बार किसी ने ये अनुमान लगाया है कि ग्लेशियरों ने जल स्तर को बढ़ाने में कितना योगदान किया”.

शोध के परिणाम दिखाते हैं कि ये ग्लेशियर औसत से अधिक पिघल रहे हैं.

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