'दिल्ली के पानी में है सुपरबग'

अस्पताल
Image caption पहले वैज्ञानिक कह चुके हैं कि भारत और पाकिस्तान में इलाज करवाने वालों के शरीर में यह बैक्टीरिया प्रवेश कर सकता है

ब्रितानी शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्हें भारत की राजधानी दिल्ली के पानी में ऐसे बैक्टीरिया का पता चला है जिस पर ज़्यादातर एंटीबायोटिक्स का असर नहीं होता.

इस बैक्टीरिया को सुपरबग भी कहा जाता है.

कार्डिफ़ यूनिवर्सिटी ने यह शोध 'द लांसेट इंफेक्शस डीज़िज़ेस' में प्रकाशित किया है.

उल्लेखनीय है कि पिछले साल जब ब्रिटेन ने 'दिल्ली सुपरबग' की बात कही थी तो भारत सरकार ने इसका कड़ा विरोध किया था.

भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना था कि इस सुपरबग बैक्टीरिया का भारत से संबंध जोड़ना उचित नहीं है और यह भारत के ख़िलाफ़ 'दुष्प्रचार' है.

शोध

शोधकर्ताओं ने दिल्ली भर से पानी के नमूने लिए और उसकी जाँच की.

इसमें सार्वजनिक नलों से भी पानी लिए गए और जगह-जगह जमा गंदे पानी के भी नमूने लिए गए.

शोधकर्ताओं ने पाया कि चार प्रतिशत नल के पानी में और तीस प्रतिशत गंदे पानी के बैक्टीरिया में एनडीएम-1 जीन थे.

ये वही जीन है जो व्यापक रुप से इस्तेमाल में लाए जाने वाले एंटीबायोटिक्स का प्रतिरोध पैदा करता है.

इसमें ऐसे बैक्टीरिया भी पाए गए जो हैज़ा और दस्त की बीमारी पैदा करते हैं.

बीबीसी के विज्ञान संवाददाता नील बाउडलर का कहना है कि शोधकर्ताओं ने इसके लिए पानी की अपर्याप्त सफ़ाई और पानी में गंदे पानी के मिश्रण को ज़िम्मेदार ठहराया है.

कार्डिफ़ यूनिवर्सिटी के डॉक्टर मार्क टोलेमॉन का कहना है कि दिल्लीवासियों अनावश्यक ख़तरे का सामना कर रहे हैं.

उनका कहना है, "जो लोग भी दिल्ली के पानी पी रहे हैं या इस पानी में पके भोजन को खा रहे हैं उनके शरीर में लगातार बहुत सी दवाओं के लिए प्रतिरोध पैदा करने वाला बैक्टीरिया जा रहा है."

वैसे एनडीएम-1 जीन का पता पहली बार वर्ष 2008 में लगा था.

तब से अब तक ब्रिटेन के अलावा अमरीका और कनाडा में भी इसका पता चल चुका है.

इससे यह चिंता पैदा हुई थी कि भारत में इलाज के लिए आने वाले विदेशियों के भीतर भी यह जीन प्रवेश कर सकता है.

हालांकि भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसका ज़ोरदार प्रतिरोध किया था और कहा था कि ज़रुरी नहीं है कि यह दिल्ली में ही पैदा हो रहा हो.

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