विचारों से संचालित होगा ‘माउस’

अमरीका में हुए एक शोध के मुताबिक कंप्यूटर की स्क्रीन पर मौजूद ‘कर्सर’ अब हमारे विचारों से संचालित हो सकेगा.

मस्तिष्क से मिलने वाले संकेतों को इससे पहले भी गतिविधियों और चित्रों के रुप में ढाला जा चुका है, लेकिन यह नई तकनीक मस्तिष्क की सतह पर मौजूद तंत्रिकाओं पर आधारित है.

बीबीसी के विज्ञान और तकनीक संवाददाता जैसन पामर के मुताबिक अत्यंत सूक्ष्म प्रणाली पर आधारित इस तकनीक को ‘इलेक्ट्रोकॉर्टिकोग्राफ़ी’ कहते हैं.

अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक यह नई तकनीक मनुष्य और कंप्यूटर के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित करेगी और खासतौर पर विकलांगों के लिए फ़ायदेमंद होगी.

इससे पहले इस तकनीक का इस्तेमाल उपयोगकर्ताओं की ओर से दिए जाने वाले संकेतों के आधार पर बिजली से चलने वाली व्हीलचेयर्स और खिलौनों को चलाने के लिए किया जा चुका है.

इस तकनीक के तहत मस्तिष्क के बाहर मौजूद संकेतों को सोख लिया जाता है जिसके ज़रिए संप्रेषण की प्रक्रिया पूरी होती है.

इस शोध में शामिल हुए लोगों से कहा गया कि वो ध्वनि पर आधारित स्वरों जैसे ‘ऊ, आ, ई, अ:’ का उच्चारण करें. इस दौरान देखा गया कि तेज़ ध्वनि के उच्चारण के दौरान पैदा हुए मस्तिष्क के संकेत कंप्यूटर की स्क्रीन पर मौजूद ‘कर्सर’ को हिलाने के लिए काफ़ी थे.

इसके लिए शल्यक्रिया के ज़रिए सिर की हड्डी के नीचे प्लास्टिक का एक पैड रखा जाता है जिसमें बिजली के तंत्र लगे हों.

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