रिपोर्ट कार्ड में होगा बच्चों का वज़न

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Image caption मलेशियाई खाने में तेल ख़ूब इस्तेमाल होता है और खाना फ़्राई भी किया जाता है

स्कूल में बच्चों की पढ़ाई का लेखा-जोखा जानने के लिए उनके अंक रिपोर्ट कार्ड में दर्ज किए जाते हैं लेकिन मलेशिया में माजरा कुछ दूसरा ही है.

लोगों में बढ़ते मोटापे से परेशान मलेशिया सरकार ने अब स्कूलों को फ़रमान जारी किया है कि रिपोर्ट कार्ड में बच्चों के वज़न और कद संबंधी जानकारी भी दर्ज रहेगी.

मलेशिया के स्वास्थ्य मंत्री ने बताया है कि दक्षिणपूर्व एशिया में मोटे लोगों की एक बड़ी आबादी मलेशिया में रहती है.

मोटापे पर लगाम कसने के लिए अब स्कूली शिक्षकों को कहा गया है कि वे बच्चों का वज़न और कद नापें ताकि ये पता चल सके कि उनका बॉडी मास इंडेक्स सही है या नहीं.

अधिकारियों के मुताबिक ऐसा करने से अभिभावकों को ये जानने में मदद मिलेगी की उनका बच्चा मोटापे का शिकार तो नहीं है.

खाने में तेल और चीनी

ये नया क़दम विवादित लग सकता है लेकिन स्कूलों में किशोरियाँ भी इसका समर्थन कर रही हैं.

ऐसी कई लड़कियों ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “हमें ये पता चल सकेगा कि हमारा वज़न कितना होना चाहिए...मुझे ये चिंता रहती है कि मैं मोटी न हो जाऊँ.”

मलेशिया सरकार के मुताबिक छह में से एक नागरिक का वज़न या तो ज़रूरत से ज़्यादा है या वो ज़बरदस्त मोटापे क शिकार है.

इसका कारण मलेशिया में फ़ास्ट फ़ूड का बढ़ता चलन ही नहीं है बल्कि मलेशियाई खाना भी है जो काफ़ी तैलीय होता है.

एक बच्चे के अभिभावक सैफ़ुल कहते हैं, “मलेशिया के लोगों को स्वास्थ्यवर्धक खाना खाने के लिए राज़ी करना मुश्किल काम है. हमारा मुख्य खाना है नारियल वाले चावल, हर चीज़ में नारियल पानी का इस्तेमाल होता है. ये स्वास्थ्य के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं है.”

मलेशिया की सरकार इस कोशिश में भी लगी है कि वहां के लोग कम चीनी का इस्तेमाल करें.

पिछले साल से वहाँ इसके लिए अभियान चल रहा है लेकिन काफ़ी मुश्किलें आई हैं. मलेशिया में ढाबों का चलन है और वहाँ चीनी वाले पेय पदार्थ ख़ूब बिकते हैं.

ऐसे में मलेशिया में लोगों को मीठा कम खाने के लिए तैयार करना मुश्किल साबित हो रहा है.

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