ऐसे मच्छर जो मलेरिया न फैलाएँ

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वैज्ञानिकों का मानना है कि मलेरिया से निपटने की प्रक्रिया में वे एक अहम उपलब्धि हासिल करने के करीब हैं.

प्रयोगों के तहत मच्छरों का डीएनए बदलने की कोशिश की जा रही है ताकि वे मलेरिया न फैला सकें. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक मलेरिया से लाखों लोगों की जान जाती है.

वैज्ञानिक जीन संशोधन प्रक्रिया के तहत प्रयोगशाला में मच्छरों का जीन बदलकर ऐसे मच्छर बनाने में तो पहले ही सफल हो चुके हैं जो मलेरिया नहीं फैला सकते. लेकिन शोधकर्ताओं के सामने चुनौती ये है इस जीन को बाहर पलने वाले मच्छरों में भी पहुँचाया जा सके.

अगर शोधकर्ता सही जीन बाहरी मच्छरों में ले जाने में सफल रहे तो ये मच्छर भी मलेरिया नहीं फैला पाएँगे.

लंदन में इंपीरियल कॉलेज के प्रोफ़ेसर आंद्रिया क्रिसांती कहते हैं कि भविष्य में ऐसा भी संभव हो सकता है कि नए जीन वाला मच्छर मनुष्यों के बजाए अन्य जानवारों को काटे या फिर केवला नर मच्छरों को जन्म दे जो मलेरिया नहीं फैला सकते.

जबकि प्रोफ़ेसर जेनेट आगाह करती हैं कि अभी बाहर पलने वाले मच्छरों के ख़िलाफ़ नई तकनीक के इस्तेमाल में वक़्त लगेगा और जीन-संशोधित तकनीक के इस्तेमाल को लेकर सामाजिक मान्यता की समस्या भी रहेगी.

वैज्ञानिकों का मानना है कि अभी इस पूरे प्रयोग पर और काम करने की ज़रूरत है.

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