चावल की क़िस्मों का मूल एक ही था

Image caption चावल की फ़सल को कोई 9,000 साल पहले चीन में लगाया गया

वैज्ञानिकों ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण अनाज चावल की उत्पत्ति पर नई रोशनी डाली है.

चावल के जीनोम पर हुआ शोध बताता है कि इसकी फ़सल को केवल एक बार ही विधिवत बोया गया.

इस समय दुनिया में चावल की दसियों हज़ार क़िस्में हैं लेकिन इनका प्रतिनिधित्व केवल दो उप-क़िस्में करती हैं.

पीएनएएस पत्रिका में प्रकाशित शोध का कहना है कि चावल की खेती कोई 9,000 साल पहले चीन में शुरु हुई थी.

दूसरा सिद्धांत ये कहता है कि चावल की दो उप-क़िस्में 'ओरिज़ा सतिवा जेपोनिका' और 'ओरिज़ा सतिवा इंडिका' एशिया के अलग अलग हिस्सों में अलग अलग रूप से बोई गई थीं.

इस सिद्धांत को इसलिए अधिक समर्थन मिला क्योंकि इन दोनों क़िस्मों में जीन संबंधी भेद हैं.

जेपोनिका क़िस्म चिपचिपी और छोटे दानों वाली है जबकि इंडिका क़िस्म चिपचिपाहट रहित और लम्बे दानों वाली है.

चावल के जीनोम का अध्ययन

लेकिन इस नवीनतम शोध में एक अंतरराष्ट्रीय दल ने जीन संबंधी डेटा का इस्तेमाल करके इस विकासपरक इतिहास की फिर से जांच की.

शोधकर्ताओं ने पाया कि इन दोनों क़िस्मों की उत्पत्ति एक ही क़िस्म से हुई क्योंकि दोनों के जीन मिलते जुलते थे.

इसके बाद शोधकर्ताओं ने 'मॉलिक्यूलर घड़ी' वाली तकनीक से चावल के विकासपरक इतिहास को जानने की कोशिश की.

जिससे ये पता चला कि चावल को आज से कोई 8,200 साल पहले बोया गया और जेपोनिका और इंडिका क़िस्में कोई 3,900 साल पहले अलग हुईं.

वैज्ञानिकों के इस दल का कहना है कि ये खोज पुरातात्विक प्रमाणों से भी मेल खाती है क्योंकि चीन की यांग्त्से घाटी में चावल की खेती 8,000 से लेकर 9,000 साल पहले शुरु हुई जबकि भारत के गंगा क्षेत्र में कोई 4,000 साल पहले चावल बोया गया.

इस शोध के सह लेखक न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के माइकिल पुरुग्गनम कहते हैं, "चावल को व्यापारियों और प्रवासी किसानों द्वारा चीन से भारत लाया गया इसलिए इस बात की संभावना है कि उसका स्थानीय जंगली क़िस्म के साथ संकरण हुआ".

"इस दृष्टि से जिसे हम भारतीय क़िस्म मानते हैं वो वास्तव में चीन में उपजी थी".

चावल की एक क़िस्म वाला ये सिद्धांत कहता है कि इंडिका और जेपोनिया क़िस्में ओरिज़ा रूफ़िपोगोन नामक जंगली चावल को बोकर तैयार की गईं.

संबंधित समाचार