मच्छरों की काट से बचना मुमकिन

मच्छर

एक नए शोध के मुताबिक़ कुछ ऐसे रसायनों का आविष्कार किया गया है जिनसे मच्छरों की इंसानों को सूंघने की क्षमता में कमी आ सकती है.

विज्ञान पत्रिका 'नेचर' में छपे इस नए शोध को रसायन विज्ञान में एक बड़ा कदम बताया जा रहा है.

विज्ञान विशेषज्ञों के अनुसार इस शोध के चलते मच्छरों को पकड़ने में और उन्हें भगाने वाली दवाओं को एक नयी दिशा मिलेगी.

ब्रिटेन के एक विशेषज्ञ ने कहा कि अगर ये नए रसायन सुरक्षित और सस्ते हुए तो ये एक बहुत बड़ा कदम होगा.

सांस लेने की प्रक्रिया के दौरान इंसान जब कार्बन डॉयक्साईड बाहर निकालते हैं तब मादा मच्छर उसे सूंघ कर इंसान पर हमला करतीं हैं.

शोधकर्ता एक लंबे समय से ऐसे रसायनों की खोज में लगे रहे हैं जिनसे मच्छरों की कार्बन डॉयक्साईड सूंघने की क्षमता रोकी जा सके.

आविष्कार

कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने मच्छरों की तीन प्रजातियों पर गंध वाले रसायनों का परीक्षण किया.

इन प्रजातियों से मलेरिया, फिलैरियासिस, डेंगू और पीला ज्वर जैसे रोग फैलते हैं.

Image caption मच्छरों के काटने से हर साल लाखों मौतें होती हैं.

मच्छरों की इन तीन प्रजातियों से फैलने वाली बीमरियों से दुनिया भर में हर साल करोड़ों लोगों बीमार पड़ते हैं जिनमे से लाखों की मौत भी हो जाती है.

शोधकर्ताओं ने अब तीन तरह के ऐसे रसायनों को खोज निकाला है जिनसे कार्बन डॉयक्साईड सूंघ लेने की मच्छरों की क्षमता पर प्रभाव पड़ सकेगा.

कार्बन डॉयक्साईड की जगह एक दूसरी गैस का प्रयोग मच्छर पकड़ने वाले जालों में किया गया जबकि दूसरे का प्रयोग इस तरह से किया गया कि मच्छरों को लगे की उनके इर्द गिर्द बड़ी मात्र में गैस मौजूद है और उन्हें दिशा भ्रम हो सके.

हालांकि मच्छरों की इंसानों को सूंघ लेने की क्षमता में शरीर से निकलने वाला पसीना और मनुष्य की त्वचा भी शामिल रहती है.

जानकारों के मुताबिक़ इस नयी शोध को पूरा करने वाले वैज्ञानिकों के समक्ष अब चुनौती है कि इन रसायनों से मनुष्यों को नुकसान नहीं पहुंचे.

कुछ विश्लेषकों का ये भी मत है कि उस दिशा में काम करने कि ज़रूरत है जिससे इन दवाओं या रसायनों का निर्माण किफ़ायती हो सके.

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