ई-कोलाई पर यूरोप में आपात बैठक

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Image caption ई कोलाई के स्त्रोत का पता लगाने के लिए अब तक की गई सभी कोशिशें नाकाम रही हैं.

यूरोपीय देशों के कृषि मंत्रियों ने ई-कोलाई बैक्टीरिया का स्रोत पता लगाने के लिए लग़्ज़ैम्बर्ग में एक आपात बैठक बुलाई है.

ई-कोलाई के स्रोत का पता लगाने के लिए अब तक की गई सभी कोशिशें नाकाम रही हैं, जिसकी वजह से अधिकारियों को काफ़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.

यूरोपीय कृषि मंत्री अब ये जानने की कोशिश में लगे हैं कि विशेषज्ञ इस बैक्टीरिया का पता लगाने में कितने कामयाब हो पाए हैं.

इससे पहले स्पेन से आने वाले जैविक खीरों को इस संक्रमण के लिए दोषी ठहराया गया था, लेकिन इसे साबित करने के लिए कोई तथ्य सामने नहीं आ सके.

इसके बाद जर्मनी में उगाए जाने वाले अंकुरित लोबिया पर भी परीक्षण किया गया था, जिसके परिणाम में कुछ ठोस निकल कर नहीं आ सका. जर्मनी के जिस फ़ार्म पर ई-कोलाई का स्रोत होने की आशंका जताई जा रही थी, उसके 40 में से 23 सैंपल में इस बैक्टीरिया के कोई सबूत नहीं मिले.

अब तक ई-कोलाई संक्रमण से कम से कम 22 लोगों की मौत हो चुकी है और कम से कम दो हज़ार लोग अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से ज़्यादातर मामले उत्तरी जर्मनी में सामने आए हैं.

यूरोपीय यूनियन के स्वास्थय आयुक्त जॉन डैली ने कहा है कि ई कोलाई संक्रमण अब तक केवल उत्तरी जर्मनी तक सीमित है और इसे रोकने के लिए पूरे यूरोप में निरीक्षण की ज़रुरत नहीं है.

जॉन डैली ने ये भी कहा कि इस संक्रमण से जुड़ी कोई भी जानकारी जारी करने से पहले उसे पूरी तरह जांच लेना चाहिए, ताकि किसानों को बेवजह नुक़सान का सामना न करना पड़े.

मुआवज़े की मांग

जर्मनी की ओर से लगाए गए आरोपों की वजह से किसानों को हुए नुक़सान की भरपाई के लिए स्पेन ने जर्मनी से 100 फ़ीसदी क्षतिपूर्ति की मांग की है.

फल और सब्ज़ियां निर्यात करने वाले स्पेन के संगठन के अनुमान के मुताबिक़ संक्रमण से जुड़ी ग़लत ख़बरों की वजह से पिछले एक हफ़्ते में उन्हें क़रीब 1,600 करोड़ रुपए का नुक़सान हुआ है.

मुआवज़े की मांग करने वाले देशों में स्पेन अकेला नहीं है, बल्कि दूसरे देशों ने भी बिक्री में आई गिरावट की भरपाई की मांग की है.

यूरोपीय कृषि मंत्रियों की इस बैठक में किसानों को दिए जाने वाले मुआवज़े पर चर्चा होगी.

बीबीसी के यूरोप के संवाददाता क्रिस मौरिस का कहना है कि इस संक्रमण पर हो रही गहन चर्चा को देख कर कहा जा सकता है कि यूरोपीय एकजुटता की एक बार फिर परीक्षा ली जा रही है.

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Image caption इस संक्रमण से जुड़ी अफ़वाहों की वजह से किसानों को भारी नुक़सान झेलना पड़ा है.

ग़लत आरोप

सोमवार को जर्मन अधिकारियों ने कहा था कि ऐसा संभव है कि यूरोप में 22 लोगों की जान लेने वाले और दो हज़ार से अधिक लोगों को बीमार करने वाले घातक ई-कोलाई बैक्टीरिया का स्रोत सलाद के लिए तैयार अंकुरित बीन्स हो.

अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि उन्होंने जर्मनी में स्थित यूलज़ेन के एक फ़ार्म में इस बैक्टीरिया का स्रोत ढूँढ़ लिया है.

लेकिन बाद में ज़्यादातर परीक्षणों में इस दावे को ग़लत पाया गया.

इस फ़ार्म में सलाद के लिए ब्रोकली, मटर और मूंग सहित बहुत सी सब्ज़ियाँ उगाई जाती हैं और अंकुरित बीन्स तैयार किए जाते हैं.

फ़ार्म के संचालक क्लॉस वर्बेक ने एक स्थानीय अख़बार को बताया कि ये आरोप सरासर ग़लत हैं. उन्होंने कहा, "अंकुरित चीज़ों को सिर्फ़ बीजों और पानी के ज़रिए उगाया जाता है और उनमें किसी भी प्रकार की खाद नहीं डाली जाती. तो फिर कोई बैक्टीरिया पैदा होने का सवाल ही नहीं उठता."

वैज्ञानिकों का कहना है कि वैसे तो ई-कोलाई एक तरह का एक सामान्य बैक्टीरिया है जो इंसानों और मवेशियों के पेट में हमेशा रहता है और इसका संक्रमण ज़्यादातर मल के ज़रिए होता है.

इसके ज़्यादातर रूप हानिरहित हैं, लेकिन ई-कोलाई के कुछ बैक्टीरिया घातक हैं और वह पेट में मरोड़ और दस्त जैसे लक्षण पैदा करते हैं.

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