'ब्लैक होल ने तारे को निगला'

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ब्रिटेन के खगोलविदों ने ब्लैक होल में फंस कर एक तारे की मौत होने के सबूत जुटाने का दावा किया है.

बताया जा रहा है कि एक तारा परिभ्रमण के दौरान एक ब्लैक होल के इतना क़रीब आ गया कि परिणाम धीमी मौत के अलावा कुछ और हो ही नहीं सकता था.

वॉरिक विश्वविद्यालय के खगोलविद डॉ. एंड्र्यू लेवन की टीम ने इस साल 28 मार्च को अंतरिक्ष में गामा किरणों का एक तूफ़ान दर्ज़ किया. आमतौर पर किसी बूढ़े तारे में विस्फोट के दौरान गामा किरणों का रेला निकलता है.

लेकिन ऐसी स्थिति में विकिरण का महाप्रवाह एक बार ही होता है, जबकि मार्च में पहली बार दिखा गामा किरणों का प्रवाह ढाई महीने बाद अब भी रह-रह कर ज़ोर पकड़ रहा है.

भारी ऊर्जा

डॉ. लेवन इसे किसी तारे के ब्लैक होल की चपेट में आने का नतीजा बता रहे हैं. उन्होंने कहा, "जितनी मात्रा में ऊर्जा सामने आ रही है, वो वैसी स्थिति में संभव है जब किसी तारे को एक ब्लैक होल में फेंक दिया जाए."

खगोलविदों का मानना है कि हर आकाशगंगा के केंद्र में एक ब्लैक होल होता है. लेकिन उसकी उपस्थिति का स्वतंत्र रूप से अंदाज़ा लगा पाना असंभव है क्योंकि ब्लैकहोल में महागुरुत्व की अवस्था होती है जिसके चंगुल से प्रकाश तक नहीं निकल सकता है.

ब्रह्मांड के किसी कोने में ब्लैक होल की उपस्थिति का हमें तभी पता चलता है जब तारे जैसा कोई बड़ा खगोलीय पिंड उसका शिकार बनता है.

कोई तारा ब्लैक होल में समाने की प्रक्रिया में पहले अपना गोल आकार खोता है. महागुरुत्व के असर से वह लगातार पिचकता जाता है.

तारे का स्वतंत्र अस्तित्व पूरी तरह ख़त्म हो उससे पहले उससे रह-रह कर एक्स और गामा किरणों का रेला निकलता है जो धरती पर रेडियो दूरबीनों के ज़रिए देखा जा सकता है.

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