मधुमेह पीड़ितों की संख्या दोगुनी हुई

मधुमेह
Image caption मधुमेह अब ग़रीब देशों को भी अपनी चपेट में ले रहा है.

हाल में जारी एक शोध में ये पाया गया है कि पिछले लगभग तीन दशकों में विश्व भर में मधुमेह रोग से पीड़ित वयस्कों की संख्या दोगुनी हो गई है और 35 करोड़ लोग इस रोग के शिकार हैं.

लैंसेट नाम की पत्रिका में छपे इस शोध मे कहा गया है कि ये पहले अनुमानित संख्या से कहीं ज़्यादा है.

ताज़ा आंकड़े, दो साल पहले यानि साल 2009 में जारी अनुमानित तादाद से साढ़े छह करोड़ अधिक हैं.

विश्व स्वास्थ संगठन और गेट्स फाउंडेशन की मदद से किए गए इस शोध में कहा गया है कि मधुमेह से पीड़ित लोगों की संख्या पूरे विश्व में तेज़ी से बढ़ रही है जिसका असर स्वास्थ्य बजट पर पडे़गा.

मोटापा

शोधकर्ताओं ने कहा है कि इसका कारण जनसंख्या में हो रही बढ़ोतरी और उम्र-दराज़ लोगों की तादाद में इज़ाफ़ा है.

उन्होंने कहा है कि लोगों में मोटापा तेज़ी से बढ़ रहा है और यह इस बीमारी की सबसे बड़ी वजह है.

मधुमेह रोग के क्षेत्र में किया गया ये अबतक का सबसे व्यापक शोध है.

इस स्टडी को करने के लिए तीन सालों के दौरान 30 लाख लोगों के ख़ून का सैंपल लिया गया जिसके आधार पर विश्व भर में मधुमेह से पीड़ित लोगों की जानकारी इकट्ठा हुई.

शोधकर्ताओं का कहना है कि अब ये सिर्फ़ अमीर देश में पाई जानेवाली बीमारी नहीं है बल्कि भविष्य में ये दुनिया भर के देशों में स्वास्थ्य के क्षेत्र में ख़र्च किए जानेवाले बजट पर एक बड़ा बोझ साबित होगा.

Image caption मोटापा मधुमेह रोग का एक बड़ा कारण है.

शोध में पाया गया है कि 70 फ़ीसद मामलों में मधुमेह की बीमारी में बढ़ोतरी की वजह जनसंख्या और उम्र में इज़ाफ़ा है जबकि 30 प्रतिशत लोगों को ये मोटापे के कारण अपनी चपेट में ले रहा है.

भारत

भारत और चीन में मधुमेह के 13.8 करोड़ रोगी हैं. जबकि अमरीका और रूस में उनकी संख्या 3.6 करोड़ है.

भारत को डायबिटीज़ की दुनिया की राजधानी कहा जाता है. डायबिटीज़ एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के डॉक्टर विजय अजगाँवकर के मुताबिक देश की 20 प्रतिशत आबादी मधुमेह से पीड़ित है.

वो कहते हैं, ‘हर जगह शहरीकरण होने की वजह से लोगों के खाने-पीने का तरीका बदल गया है, मानसिक तनाव में भी वृद्धि हुई है. देहातों में भी लोग पैदल नहीं चलते हैं. लोगों के पास मोटर-बाईक है, या फिर ऑटो-रिक्शा है जिसकी वजह से जो लोग पहले पैदल चलते थे, कुएँ से पानी निकालते थे, चक्की में आंटा पीसते थे, लेकिन अब ये सब चीज़ें बंद हो गई हैं.’

डॉक्टर अजगाँवकर के मुताबिक लोगों की खुराक में भी वृद्दि हुई है, लोग बाहर का खाना ज़्यादा खा रहे हैं जिसका असर उनके शरीर पर पड़ रहा है.

वो कहते हैं कि लोगों को घर का साफ़ सुथरा और पौष्टिक खाना खाना चाहिए.

जीवन शौली

विश्व भर में ज़्यादातर लोग टाईप-2 क़िस्म के मधुमेह रोग से पीड़ित हैं जिसकी वजह है मोटापा और वैसी जीवनशैली जिसमें चलने-फिरने और कसरत की कमी है.

मधुमेह की बीमारी की वजह से हार्ट-अटैक, दिल, गुर्दे और तंत्रिकाओं की बीमारियां और अंधापन हो सकता है.

ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि दुनिया भर में हर साल तक़रीबन 30 लाख लोगों की मौत मधुमेह और उससे जुड़ी अवस्था के कारण हो जाती है.

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