मौत को चकमा देते हैं घोंघे

घोंघे
Image caption निगले जाने के बाद भी घोंघे रह सकते हैं जीवित

घोंघे मौत को चकमा दे सकते हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार चिड़ियों के खाए जाने के बाद भी घोंघे जीवित साबुत बाहर निकल आ सकने की क्षमता रखते हैं.

व्हाइट आई नामक छोटी चिड़िया जापान के द्वीप हाहाजीमा मे रहती हैं और वो घोंघे खाती हैं.

शोधकर्ताओं ने पता लगाया कि कम से कम 15 प्रतिशत घोंघे जो चिड़ियों का भोजन बनते हैं, वे उनकी बीट के ज़रिए साबुत निकल आते हैं.

इस बात से ये साबित होता है कि इसी ज़रिए घोंघों की आबादी फैली है.

ये सब जानते हैं कि चिड़िया जिन फलों को खाती हैं, उसी से उन पौधों के बीज चारों तरफ़ फैल जाते हैं.

लेकिन जापान के तोहुकु विश्वविद्दालय ने जो शोध किया है जिसे एक पत्रिका में छापा गया है, उसमें इस बात की पड़ताल की गई है कि क्या कीड़े-मकोड़ो में भी ऐसा होना संभव है.

छोटा आकार

पहले हुए शोधों से ये ज़रूर पता चला है कि तालाब के घोंघे मछलियों का आहार बनने के बाद भी जीवित रह जाते है. लेकिन ये पता नहीं था कि क्या ज़मीन पर रहने वाले घोंघे भी बच पाते हैं?

शोधकर्ता शीनीचीरों वाडा ने आश्चर्य जताते हुए कहा, "हम इस बात से चकित थे कि लगभग 15 प्रतिशत घोंघे चिड़ियों के बीट से जीवित और साबुत निकल आ गए."

ये इस तरह का पहला शोध है. इससे साफ़ पता चलता है कि इन घोंघों की अलग अलग जगह पर फैली आबादी के लिए भी चिड़िया ज़िम्मेदार हो सकती हैं.

शोधकर्ताओं ने बीबीसी को बताया कि एक घोंघा जो चिड़िया की बीट से जीवित बाहर निकलकर कई बच्चे जने.

मुख्य वजह

वैज्ञानिको के अनुसार खाए जाने के बावजूद अगर ये घोंघे बच रहे हैं, तो इसकी मुख्य वजह उनका छोटा आकार है.

औसतन 2.5 मीलिमीटर के घोंघे की बचने की संभावना बड़े घोंघे के मुक़ाबले ज़्यादा थी.

वैज्ञानिकों का कहना है कि आगे के शोध से ये बात सामने आ सकती है कि क्या छोटे घोंघों के बचने के पीछे कोई और वजह है.

हाहाजिमा द्वीप टोक्यो से 1000 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है. इस द्वीप को हाल ही में यूनेस्को के विश्व विरासत की सूची में जगह मिली है.

संबंधित समाचार