मोटापे को लेकर ब्राज़ील चिंतित

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ब्राज़ील के सबसे ग़रीब लोगों की आय में हुई बढ़ात्तरी को ब्राज़ील की अच्छी आर्थिक स्थिति के लिए एक कारण माना जाता है लेकिन इसका एक अनचाहा दुष्प्रभाव भी हो रहा है.

और वो ये कि जैसे जैसे लोगों की जेबों में पैसे बढ़ रहे हैं वो ज़्यादा खाद्य सामग्री ख़रीद रहे हैं और इतना ही नहीं इसकी वजह से सब्ज़ियों और फल की जगह ज़्यादा कैलोरी और चर्बीयुक्त वाले प्रसंस्करित खाद्य पदार्थों ने ले ली है.

विश्लेषकों का कहना है कि शहरीकरण और निष्क्रियता से भरा जीवन लोगों में मोटापा बढ़ाने की वजह बन रहे हैं.

ज़ेटेलियो वर्गास फ़ाउंडेशन की ओर से इस वर्ष जारी किए गए एक अध्ययन के अनुसार पिछले एक दशक में 3.95 करोड़ ग़रीब लोगों का जीवन स्तर सुधरा है और वे अब मध्यवर्ग का हिस्सा हो गए हैं.

ब्राज़ील में मध्यवर्ग की आबादी 55 प्रतिशत है और उनकी कुल संख्या 10 करोड़ के क़रीब है.

इसी समय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी की गई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इसी एक दशक में ब्राज़ील में वज़न बढ़ने की जो दर वर्ष 2006 में 42.7 प्रतिशत थी वह वर्ष 2010 में बढ़कर 48.1 प्रतिशत हो गई है. इसी समयावधि में मोटापे की दर 11.4 प्रतिशत से 15 प्रतिशत पहुँच गई है.

डेबोरा माल्टा स्वास्थ्य मंत्रालय में ग़ैर संक्रामक बीमारियों के विभाग की संयोजक हैं. उनका कहना है कि ये आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं. वे कहती हैं कि समाज में हुई तरक़्की की वजह से सूखे से तो राहत मिल गई लेकिन खाद्य सामग्रियों की गुणवत्ता पर नकारात्मक असर पड़ा है.

उनका कहना है, "हम पोषण के मामले में संक्रमण काल से गुज़र रहे हैं, ब्राज़ील के प्रसिद्ध और मुख्य खाद्य चावल और बीन्स की जगह प्रसंस्करित और स्नैक्स ने ले ली है."

डेबोरा कहती हैं कि सिर्फ़ 18 प्रतिशत ब्राज़ीलवासी इस सिफ़ारिश का पालन करते हैं कि हर व्यक्ति को प्रतिदिन 400 ग्राम फल और सब्ज़ियाँ खानी चाहिए.

निष्क्रिय जीवन

Image caption क़ानून व्यवस्था की समस्या की वजह से बच्चे बाहर खेलने जाना बंद कर रहे हैं

स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैंपिनास के एंडोक्रोनोलॉजी के विशेषज्ञ ब्रूनो गेलोनीज़ इस परिवर्तन को आय में वृद्धि के अलावा दो और वजहों से जोड़ते हैं. एक बढ़ता शहरीकरण जिसकी वजह से औद्योगिक उत्पादों की उपलब्धता बढ़ रही है और दूसरा निष्क्रिय जीवनशैली.

उनका कहना है बड़े शहर ज़्यादातर पैदल चलने वालों के ख़िलाफ़ दिखते हैं और बहुत से लोग इस वजह से भी घर से बाहर नहीं निकलते क्योंकि वे शहर में होने वाले अपराध से घबराते हैं.

ब्राज़ीलियन एसोसिएशन फ़ॉर स्टडी ऑफ़ ओबेसिटी एंज मेटॉबॉलिक सिंड्रोम के सदस्य और साओ पालो यूनिवर्सिटी में एंडोक्रोनोलॉजी के विशेषज्ञ अल्फ़्रेडो हैलपर्न कहते हैं कि हिंसा के डर ने भी बच्चों में मोटापा बढ़ाने में भूमिका निभाई है.

उनका कहना है कि बच्चे अब हिंसा के डर से घर से बाहर नहीं निकलते और वे घर पर या अपने अपार्टमेंट के भीतर ही गतिविधियों में लगे रहते हैं जिनमें कंप्यूटर या वीडियो गेम्स शामिल हैं.

उनका कहना है कि वज़न बढ़ने की एक और वजह लोगों के बचपन का अनुभव है. उनका कहना है कि जो बच्चे के रूप में कम वज़न के थे या कुपोषण के शिकार थे उनके शरीर में अधिक ऊर्जा एकत्रित करने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है.

सरकारी नीतियाँ

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Image caption सब्ज़ी और फल पैदा करने वालों के लिए छूट का प्रावधान किया गया है

देश में बढ़ते मोटापे की वजह से सरकार ने स्वास्थ्यवर्धक खाद्य सामग्रियों, जैसे फल और सब्ज़ी के उत्पादकों और विक्रेताओं को लाभ देने की नीति बनाई है और साथ ही प्रसंस्करित खाद्य पदार्थों में चीनी की मात्रा सीमित करने का फ़ैसला किया है.

ये दोनों फ़ैसले इसी महीने ब्राज़ील के स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी कार्यक्रम के हिस्से हैं.

सरकार ने हृदयरोगों, श्वांस संबंधी बिमारियों और मोटापे से निपटने के लिए धूम्रपान और शराब सेवन से मुक्ति जैसे प्रभावशाली क़दम उठाने का फ़ैसला किया है.

सरकार ने प्रसंस्करित और उच्च कैलोरी वाले खाद्यपदार्थों पर टैक्स बढ़ाने का भी फ़ैसला किया है.

इसके अलावा सरकार ने स्कूलों में भी स्वास्थ्यवर्धक खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाने का फ़ैसला किया है और निर्देश दिए हैं कि बच्चों को दिए जाने वाले खाद्य पदार्थों में कम से कम 30 प्रतिशत ताज़ा सामग्री होना चाहिए.

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