सुपरकंप्यूटर कर सकता है भविष्यवाणी

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Image caption अध्ययन मे देखा गया कि मुबारक के हटने से ऐन पहले मिस्र में जनभावना में भारी बदलाव आया था

क्या आप जानते है कि सुपरकंप्यूटर भविष्यवाणी भी कर सकता है.

अमरीकी शोधकर्ताओं का कहना है सुपरकंप्यूटर में अगर समाचारों को जमा किया गया तो वह दुनिया में होने वाली बड़ी घटनाओं के बारे में भविष्यवाणी करने में मदद कर सकता है.

ये अध्ययन करोड़ों लेखों पर किया गया जिनसे लीबिया और मिस्र में हुई क्रांति से पहले ही वहाँ लोगों के विरोध में भड़की भावनाओं के बारे में पता चल जाता है.

ये विश्लेषण पहली हुई घटनाओं के आधार पर किया गया. वैज्ञानिकों का कहना है कि यही तरीक़ा अपनाकर भविष्य में होने वाली घटनाओं के बारे में भी जाना जा सकता है.

सुपरकंप्यूटर ने ओसामा बिन लादेन के स्थान के बारे में भी पहले ही से संकेत दे दिए थे.

यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉए के इंस्टीच्युट फ़ॉर कम्प्युटिंग इन द ह्युमैनिटीज़, आर्ट्स एंड सोशल साइंसेज़ के अध्यापक कालेव लीतारु ने - फ़र्स्ट मंडे - नामक जर्नल में इस शोध के निष्कर्ष प्रकाशित किए हैं.

अध्ययन

इस अध्ययन के लिए जानकारी कई स्रोतों से इकट्ठा की गई. इसमें अमरीकी सरकार द्रारा चलाई जानेवाली संस्था ओपन सोर्स सेंटर और बीबीसी का विभाग - बीबीसी मॉनिटरिंग - शामिल थे.

ये दोनों ही दुनिया भर की स्थानीय मीडिया में आई ख़बरों पर निगरानी रखते हैं और उनको एकत्रित करते हैं.

इनके अतिरिक्त ऑनलाइन प्रकाशित होनेवाली समाचार वेबसाइटों का भी विश्लेषण किया गया जिनमें न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे समूह शामिल हैं जिनकी वेबसाइट पर 1945 तक की सामग्रियों को देखा जा सकता है.

कुल मिलाकर लीतारु ने विश्लेषण के लिए दस करोड़ लेखों को इकट्ठा किया.

इन रिपोर्टों का विश्लेषण दो तरह की जानकारियों के लिए किया गया - मूड यानी भावना और लोकेशन यानी स्थान.

इसके बाद लोगों की भावनाओं और स्थान के आधार पर समाचारों का विश्लेषण किया गया और उनके ज़रिए वेब पर 100 खरब संबंधों को जोड़ा गया.

सुपरकम्प्यूटर

अध्ययन में हासिल किए गए आँकड़ों को एसजीआई ऐल्टिक्स सुपरकंप्यूटर में डाला गया जिसे नॉटिलस कहते हैं. ये सुपरकंप्यूटर युनिवर्सिटी ऑफ़ टेनिसी में रखा हुआ है.

नॉटिलस ने ख़ास-ख़ास तरह की बातें पूछने पर अलग-अलग देशों के ग्राफ़ बनाए जिनसे अरब देशों में आई क्रांति का अंदाज़ा मिल जाता है.

कालेव लीतारु कहते हैं कि ये सिस्टम अमरीकी सरकार के ख़ुफ़िया तंत्र से अधिक बेहतर जानकारी दे सकता है.

हज़ारों कहानियों के इन समग्र परिणामों में से हरेक मामले में पाया गया कि उस देश में घटनाएँ होने से पहले ही लोगों की भावनाओं में आए बदलाव के बारे में पता चल गया.

मगर इस अध्ययन में अभी केवल पहले हो चुकी घटनाओं का विश्लेषण किया गया है.

वैज्ञानिक अब इस तकनीक के विकास में लगे हुए हैं जिनसे कि बड़ी घटनाओं की चेतावनी पहले से ही मिल सके.

कालेव लीतारु कहते हैं,"ये एक शेयर बाज़ार के सूचकांक की तरह की चीज़ होगी जिससे आपको पता लगेगा कि चीज़ें पिछले कुछ मिनटों में किस दिशा में थीं और आगे किस दिशा में बढ़ेंगी."

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