तेज़ी से फैल रहा है दवा प्रतिरोधी टीबी

Image caption डब्लूएचओ के मुताबिक यूरोप में हर साल 81 हज़ार मामले पाए जाते हैं.

यूरोप के 53 देशों में दवा प्रतिरोधी क्षय रोग (टीबी) की रोकथाम के लिए एक योजना बनाई गई है.

दवा प्रतिरोधी टीबी से पीड़ित व्यक्ति पर एंटीबायोटिक दवाओं का कोई असर ही नहीं पड़ता है.विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने इस बीमारी को ख़तरनाक़ बताया है.

दवा प्रतिरोधी टीबी के लिए बनाए गई योजना का मक़सद इलाज़ को बढ़ाना और इसकी पहुँच अधिक से अधिक लोगों तक करना है.

जन और धन की बचत

विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना की मदद से 2015 तक अरबों पाउंड की रकम और एक लाख 20 हज़ार लोगों की जान बचाई जा सकेगी.

बीबीसी के स्वास्थ्य संवाददाता जेन ड्रीपर के मुताबिक़ पूर्वी यूरोप इससे सबसे ज्यादा संक्रमित है, वहीं पश्चिमी यूरोप, लंदन में किसी भी राजधानी की तुलना में इस तरह के टीबी से संक्रमण की दर सबसे ज्यादा है.

डब्लूएचओ के मुताबिक़ यूरोप में हर साल दवा प्रतिरोधी टीबी के 81 हज़ार मामले सामने आते हैं, हालांकि यूरोप के कई देश इसका पता नहीं लगा पाते हैं.

इससे पीड़ित लोगों में से केवल एक तिहाई की ही पहचान हो पाती है, क्योंकि बहुत से देशों के पास इसका पता लगाने और इलाज करने की क्षमता नहीं है.

रूस, उक्रेन और अजरबैजान उन देशों में शामिल हैं जहाँ यह बीमारी अधिक पाई जाती है. इससे पीड़ित व्यक्ति को करीब दो साल तक अस्पताल में अलग रख कर इलाज करना पड़ता है.

इस तरह के टीबी ब्रिटेन के बड़े शहरों में अधिक पाई जाती है. लंदन में हर साल इसके साढ़े तीन हज़ार मामले पाए जाते हैं.

बढ़ता रुझान

ब्रिटेन में 2009 में दवा प्रतिरोधी टीबी के 58 मामले थे. इससे पीड़ित लोग अगर इसकी दवा का कोर्स पूरा नहीं कर पाते हैं तो उनका प्रतिरोध बढ़ सकता है.

'द हेल्थ प्रोटक्शन एजेंसी' के क्षय रोग विशेषज्ञ डाक्टर इब्राहिम अबुबकर कहते हैं, 'हालांकि पीड़ितों की संख्या कम है, इसके बाद भी पिछले दशक में इसका रुझान बढ़ा है۔'

वे कहते हैं, 'हम संतुष्ट नहीं हो सकते हैं, एक-एक मामले के इलाज़ का खर्च सैकड़ों-हज़ारों पाउंड तक जा सकता है.'

टीबी ऐसी बीमारी है जिसका संक्रमण हवाओं के जरिए फैलता है, जो कि सात फ़ीसदी मामलों में अभी भी घातक है, कई दवाओं की प्रतिरोधक क्षमता वाले टीबी से पीड़ित लोगों में क़रीब आधे की मौत हो जाती है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ब्रिटेन की ‘खोजो और इलाज’ करने की योजना की सराहना की है. इस योजना के तहत एक सचल एक्स-रे वाहन बेघर लोगों और नशे के शिकार लोगों के बीच जाकर टीबी से पीड़ितों की तलाश की जाती है.

संबंधित समाचार