डेनमार्क में चर्बी कर लगाने का फ़ैसला

मक्खन
Image caption कुछ वैज्ञानिक डेनमार्क सरकार के इस फ़ैसले से संतुष्ट नहीं हैं.

डेनमार्क ने दुनिया में शायद पहली बार चर्बी कर लगाने का फ़ैसला किया है.

ये चर्बी कर खाने पीने की उन चिज़ों पर लगाया जाएगा जिनमें चर्बी की मात्रा अधिक होगी.

मक्खन, दूध, पनीर, पीज़्ज़ा, मांस, तेल और खाने की दूसरी चीज़ों पर ये कर लगेगा अगर उनमें चर्बी की मात्रा 2.3 फ़ीसदी से अधिक होगी.

कुछ उपभोक्ताओं ने तो खाने पीने की चीज़ों के दामों में बढ़ोत्तरी की आशंका के मद्देनज़र उन्हें ख़रीदकर जमा करना भी शूरू कर दिया है.

जबकि कुछ लोगों का कहना है कि इस नए कर को लागू करने में नौकरशाहों को एक भयावह अनुभव होगा.

कुछ लोगों का अनुमान है कि डेनमार्क के लोग अब दूसरे देशों से खाने पीने का सामान ख़रीदना शूरू कर देंगें.

डेनमार्क के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि इस नए कर से ज़्यादा चर्बी वाले खाने की चीज़ों के उपभोग में कमी आएगी.

अधिकारियों के अनुसार इस कर के कारण लोग ज़्यादा चर्बी वाली चीज़ों को खाना कम कर देंगे.

लेकिन कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि ज़्यादा चर्बी वाले खाद्ध पदार्थों को निशाना बनाना शायद ग़लत होगा.

उन वैज्ञानिकों के अनुसार नमक, चीनी और कार्बोहाइड्रेट स्वास्थ्य के लिए ज़्यादा हानिकारक हैं और इसलिए उनके मुताबिक़ सरकार को ज़्यादा चर्बी वाले खाद्ध पदार्थों के बजाए पहले उन चीज़ों पर ध्यान देना चाहिए

संबंधित समाचार