मोबाइल फ़ोन और ब्रेन कैंसर में कोई संबंध नहीं

 शुक्रवार, 21 अक्तूबर, 2011 को 13:11 IST तक के समाचार
मोबाईल फ़ोन

इस शोध से मोबाईल के इस्तेमाल पर उठ रहे विवाद को कम करने में मदद मिलेगी.

पिछले 20 वर्षों से मोबाइल के इस्तेमाल से होने वाले ख़तरों के बारे में हमेशा चर्चा होती रही है अब एक नए शोध के मुताबिक़ मोबाइल फो़न के इस्तेमाल करने और ब्रेन कैंसर होने में कोई संबंध नहीं है.

डेनमार्क की एक संस्था 'इंस्टीट्यूट ऑफ़ कैंसर एपिडेमियोलोजी' ने 18 वर्षों के अंतराल में लगभग साढ़े तीन लाख मोबाइल इस्तेमाल करने वालों के बारे में शोध किया.

इस शोध के बाद शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुँचे कि मोबाइल इस्तेमाल करने वालों को मोबाइल नहीं इस्तेमाल करने वालों की तुलना में ब्रेन कैंसर का ऐसा कोई ज़्यादा ख़तरा नहीं है.

ये ताज़ा शोध ब्रिटेन की मेडिकल जर्नल की वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है.

इससे पहले भी ऐसे कई अध्ययन हुए हैं जो इसी नतीजे पर पहुँचे हैं.

लेकिन ऐसे भी कई शोध हुए हैं जो मोबाइल इस्तेमाल सुरक्षित है या नहीं इस पर प्रश्न उठाते हैं. इसके कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि मोबाइल के इस्तेमाल से कैंसर हो सकता है.

'कोई ख़तरा नहीं'

"ये शोध अब तक के सबसे मज़बूत सबूत हैं कि मोबाईल फ़ोन के इस्तेमाल से ब्रेन कैंसर होने का कोई ख़तरा नहीं है."

हैजल नन, ब्रिटेन के कैंसर रिसर्च के स्वास्थ्य अधिकारी

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मोबाइल फ़ोन को भी उसी श्रेणी में रखा है जिसमें उसने कॉफ़ी को रखा है.

यानि मोबाइल फ़ोन के इस्तेमाल का कैंसर से कोई संबंध है ना तो इससे इनकार किया जा सकता है और ना ही इसे साबित किया जा सकता है.

स्वास्थ्य विभाग हमेशा ये सुझाव देता रहता है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सिर्फ़ बहुत ही ज़रूरी कामों के लिए मोबाइल का इस्तेमाल करना चाहिए और वो भी उन्हें अपने फ़ोन कॉल की अवधि को छोटी रखनी चाहिए.

डेनमार्क में किए गए शोध में भी जिन तीन लाख 58 हज़ार 403 मोबाइल इस्तेमाल करने वालों की जांच की गई, उनमें से केवल 1202 लोगों में कैंसर के लक्षण पाए गए.

मोबाइल नहीं इस्तेमाल करने वालों में भी इसी अनुपात में कैंसर के लक्षण पाए गए थे.

शोधकर्ताओं ने कहा कि 13 वर्ष से भी ज़्यादा समय तक मोबाइल का इस्तेमाल करने वालों में कैंसर का कोई ख़तरा नहीं पाया गया.

लेकिन फिर भी शोधकर्ताओं ने कहा कि मोबाइल इस्तेमाल करने वालों की लगातार जांच होनी चाहिए और ख़ासकर बच्चों पर इसके असर की जाँच करनी चाहिए.

ब्रिटेन के कैंसर रिसर्च की स्वास्थ्य अधिकारी हैज़ल नन का इस बारे में कहना था, ''ये शोध अब तक के सबसे मज़बूत सबूत हैं कि मोबाइल फ़ोन के इस्तेमाल से ब्रेन कैंसर होने का कोई ख़तरा नहीं है.''

स्वीडन के कैरोलिंस्का इस्टीट्यूट के प्रोफ़ेसर एंडर्स अहलबॉम ने भी डेनमार्क में किए गए शोध की तारीफ़ की.

कैंब्रिज विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर डेविड स्पीजेलहॉलटर की राय भी कुछ इसी तरह की है.

उनका कहना है, ''मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करने वालों के आंकड़े सिर्फ़ 1995 से मिलते हैं इसलिए सिर्फ़ पहले से इस्तेमाल कर रहे और बाद में मोबाइल इस्तेमाल करने वालों की तुलना की जा सकती है, लेकिन ब्रेन ट्यूमर पर मोबाइल फ़ोन के इस्तेमाल के किसी तरह के प्रभाव नही होने की बात एक मज़बूत साक्ष्य है.''

लेकिन शोधकर्ता भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि इस अध्ययन की कुछ सीमाएं थीं, मसलन इस शोध के लिए चुने गए लोगों में निजी कनेक्शन वाले मोबाइल इस्तेमाल करने वाले थे, इनमें एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं था जिसके पास कॉरपोरेट कनेक्शन था. और सबसे ज़्यादा मोबाइल का इस्तेमाल कॉरपोरेट कनेक्शन वाले ही करते हैं.

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