शीत युद्ध के दिनों का शक्तिशाली बम 'बी-53' नष्ट किया गया

बी-53 परमाणु बम (फ़ाईल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट reuters
Image caption अमरीका में कई पुराने परमाणु हथियारों को अमरीकी शस्त्रागार से हटाया जा रहा है.

शीत युद्ध के दिनों के अमरीका के सबसे शक्तिशाली परमाणु बमों में से एक 'बी-53' को टेक्सास में नष्ट किया जा रहा है.

ये बम(बी-53) दूसरे विश्व युद्ध के दौरान 1945 में जापान के हिरोशिमा पर गिराए गए बम से छह सौ गुना ज़्यादा शक्तिशाली बम था.

शीत युद्ध के दिनों में 1962 में क्युबा संकट के समय इस बम को पहली बार सेना के हवाले किया गया था और 1997 तक ये बम अमरीका के परमाणु हथियारों का हिस्सा था.

युद्ध के दौरान ज़मीन के अंदर बंकर में छुपे दुश्मनों को निशाना बनाने के लिए इस बम को तैयार किया गया था.

बी-53 बमों को पहली बार 80 के दशक में नष्ट किया गया था लेकिन उनमें से कई बच गए थे और बचे हुए बमों को 1997 में पूरी तरह परमाणु हथियारों के ज़ख़ीरे से हटा दिया गया था.

इसका वज़न लगभग साढ़े चार टन था और ये एक छोटी वैन के आकार का था.

लेकिन अब आधुनिक बम बनाए जा चुके हैं जो कि आकार में बहुत छोटे होते हैं.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि वो देश के परमाणु हथियारों में कटौती करना चाहते हैं.

इस बम को निर्धारित समय से एक साल पहले ही नष्ट किया जा रहा है.

लेकिन इसे नष्ट करने के लिए एक ख़ास तरह का प्रोग्राम बनाया गया है क्योंकि ये बम पुरानी तकनीक के ज़रिए बनाए गए थे और इसे बनाने वाले ज़्यादातर वैज्ञानिक या तो सेवानिवृत हो गए हैं या मर चुके हैं.

अमरीकी ऊर्जा मंत्रालय के एक अधिकारी थौमस डी अगॉस्टीनो ने इस घटना को मील का पत्थर बताया है.

उनका कहना है, ''बी-53 के नष्ट होने के बाद ये दुनिया एक सुरक्षित जगह हो गई है. 'बी-53' बम एक दूसरे समय में एक दूसरी दुनिया के लिए बनाया गया था. आज हमलोग शीत युद्ध के दिनों के परमाणु हथियार की मांसिकता से आगे निकल कर 21वी सदी की तरफ़ जा रहें हैं.''

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