हिसाब से ही लें पैरासिटामोल

Image caption दवा की ज़्यादा ख़ुराक से गुर्दे खराब हो सकते हैं

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि पैरासिटामोल को रोज़-रोज़ मात्रा बढ़ाकर खाते रहना घातक हो सकता है चाहे वो बढ़ाई गई मात्रा कितनी भी छोटी क्यों ना हो.

विशेषज्ञों का कहना है कि ख़ुराक से ज़्यादा गोलियाँ रोज़ खाने से हफ़्तों में या फिर महीनों में इसका ख़तरनाक असर देखा जा सकता है.

एडिनबरा युनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस विषय पर शोध किया है और 161 मामलें में 'ओवरडोज़' यानी ज्यादा ख़ुराक से विपरीत परिणाम देखने को मिले.

उनका कहना है कि पुराने दर्द को भगाने के लिए पैरासिटामोल ले रहे लोगो को ये पता नहीं चल सकता है कि कब ख़ुराक ज्यादा हो गई है और लिवर यानी गुर्दे पर असर पड़ने लगा है.

शोधकर्ताओं ने बताया कि जान को खतरे में डालने वाले ये लक्षण मरीज़ों और यहाँ तक कि डॉक्टरों की निगाहों से भी बच सकते हैं.

डॉक्टरों को ख़ून की जांच से इनका पता नहीं चल सकता है क्योंकि सामान्य जाँच में लक्षण तभी अधिक स्पष्ट होते हैं जब एक ही बार में दवा की ज़्यादा ख़ुराक ली जाए.

ख़तरनाक

रिपोर्ट इस बात का इशारा करती है कि जो लोग रोज़ थोड़ी-थोड़ी ज्यादा ख़ुराक लेते हैं उनका हश्र उन लोगों से बुरा होता है जो एक ही बार में बहुत बड़ी खुराक ले लेते हैं.

इस खोज में यूनिवर्सिटी के अस्पताल में 663 मरीज़ों की जाँच की जिनके गुर्दे ख़राब थे.

इनमें 161 मामले ऐसे थे जिनमें पैरासिटामोल की थोड़ी ज्यादा ख़ुराक रोज़ ली गई थी.

इनमें मरीज़ को गुर्दे और दिमाग़ की बीमारी की शिकायत होने की संभावना ज़्य़ादा दिखाई दी और उन्हें डायलिसिस और साँस लेने में मदद की ज़रूरत भी महसूस हुई.

शोधकर्ता डॉक्टर केनेथ सिंप्सन कहते हैं,"इन लोगों ने ख़ुदकुशी के लिए एक बार में ढेर सारी गोलियां नहीं खाई हैं. लेकिन समय के साथ सेहत को नुक़सान बढ़ता जाता है जो प्राणघातक हो सकता है."

रॉयल फ़ार्मास्युटिकल सोसायटी के प्रोफ़ेसर रोजर नैग्स कहते हैं,"अगर लोगों को दर्द होता है और पैरासिटामोल से लाभ नहीं मिलता तो उन्हे दवा की खुराक बढ़ाने के बारे में नहीं सोचना चाहिए. बजाय इसके उन्हें डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए और दर्द जिस वजह से हो रहा है उसपर मदद लेनी चाहिए."

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