कितनी कॉफ़ी पीना है सही?

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Image caption कॉफ़ी के अलावा कैफ़ीन चाय, चॉकलेट, कुछ सॉफ़्ट ड्रिंक्स में भी होती है.

बड़े-बड़े बाज़ारों या मुख्य मार्गों पर बिकने वाली कॉफ़ी में कैफ़ीन की मात्रा अलग-अलग होती है. इसका मतलब ये भी हुआ कि हम प्रतिदिन कैफ़ीन की जितनी मात्रा लेते हैं, वो हमारी सोच से ज़्यादा हो सकती है.

लेकिन क्या ये एक समस्या है? कैफ़ीन की कितनी मात्रा पीने के लिए सुरक्षित है?

एक कप कॉफ़ी में कैफ़ीन की मात्रा उस पर निर्भर करती है कि आपका कप कितना बड़ा है, कॉफ़ी कितनी महीन पिसी गई है, भुनी हुई कॉफ़ी कितनी काली है, ब्रूइंग के लिए किस पद्धति का इस्तेमाल किया है, कितनी कॉफ़ी का इस्तेमाल हुआ है और किस तरह की कॉफ़ी का इस्तेमाल हुआ है.

एक कप इंस्टैंट कॉफ़ी एक मग ब्रू कॉफ़ी से अलग होगी. घर पर बना कैपेचिनो एक कॉफ़ी शॉप में ख़रीदे गए लाटे के बड़े कप से अलग होगा.

वैसे कॉफ़ी के अलावा कैफ़ीन चाय, चॉकलेट, कुछ सॉफ़्ट ड्रिंक्स और कुछ दवाइयों में भी पाया जाता है.

लोग भी अलग-अलग तरह से कैफ़ीन से प्रभावित होते हैं. कुछ लोगों का शरीर कैफ़ीन के प्रति ज़्यादा संवेदनशील होता है, इसलिए उन्हें इसकी मात्रा को भी नियंत्रित करना पड़ता है.

गर्भवती महिलाएं और कॉफ़ी

लेकिन बात जब गर्भवती महिला की आती है, तो ये ख़ास तौर पर अहम हो जाता है. ऐसी महिलाओं को प्रतिदिन 200 मिलिग्राम कैफ़ीन लेने की सलाह दी जाती है. इसका मतलब ये हुआ कि वे प्रतिदिन दो मग या चार कप कॉफ़ी पी सकती हैं.

फ़ूड स्टैंडर्स एजेंसी ने वर्ष 2008 में ये सलाह जारी की थी. एजेंसी ने चेतावनी दी थी कि कैफ़ीन की ज़्यादा मात्रा से गर्भपात हो सकता है या फिर पैदा होने वाले बच्चे का वज़न कम हो सकता है.

हालाँकि पहले इसी एजेंसी ने गर्भवती महिलाओं के लिए प्रतिदिन 300 मिलिग्राम कैफ़ीन लेने की सलाह दी थी. लेकिन ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में छपे एक शोध में ये बताया गया कि कैफ़ीन की कम मात्रा इस ख़तरे को और कम कर देती है.

शोध के मुताबिक़ कैफ़ीन गर्भवती महिला के शरीर में तेज़ी से घुल-मिल जाता है, ये आसानी से प्लेसेंटा से होकर गर्भ में पल रहे बच्चे के शरीर में फैल जाता है. कैफ़ीन की ज़्यादा मात्रा भ्रूण के विकास को प्रभावित करती है.

इस शोध के सहलेखक और लीड्स यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर जैनेट केड कहते हैं, "हर व्यक्ति अपने बच्चे के लिए अच्छा चाहता है. कैफ़ीन की मात्रा को सीमित करना एक ऐसा रास्ता हो सकता है, जो इसे सुनिश्चित करता है कि जीवन में आपके बच्चे को सर्वश्रेष्ठ शुरुआत मिले."

स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी प्रेगनेंसी बुक में ये सलाह दी गई है कि गर्भवती महिलाओं को अलग-अलग तरह के पेय पदार्थ पीने चाहिए. इसमें ये भी कहा गया है कि कैफ़ीन में पूरी तरह कटौती करने की कोई ज़रूरत नहीं है.

ये भी कहा गया है कि गर्भवती महिलाएँ कैफ़ीन मुक्त चाय और कॉफ़ी पी सकती हैं, फलों का जूस ले सकती हैं, लेकिन उन्हें एनर्जी ड्रिंक्स की मात्रा को सीमित करना चाहिए क्योंकि इनमें कैफ़ीन की मात्रा अधिक हो सकती है.

प्रैगनेंसी बुक में ये भी कहा गया है कि अगर गर्भवती महिलाएँ कभी-कभी ज़्यादा मात्रा ले लेती हैं, तो इसमें घबराने की आवश्यकता नहीं, क्योंकि इससे काफ़ी कम ख़तरा है.

कैफ़ीन के फ़ायदे

कैफ़ीन से स्वास्थ्य संबंधी फ़ायदे भी हैं. माना जाता है कि इससे व्यक्ति ज़्यादा सतर्क रहता है, काम करने की क्षमता और मानसिक दक्षता भी बढ़ती है. क्योंकि कहा जाता है कि कैफ़ीन सेंट्रल नर्वस सिस्टम को उत्तेजित करता है.

अमरीका में हुए एक बड़े अध्ययन के मुताबिक़ एक दिन में दो या ज़्यादा कप कॉफ़ी पीने वाली महिलाओं में हताश और निराश होने की कम संभावना रहती है.

हाल के एक शोध में ये भी बताया गया है कि काफ़ी प्रॉस्टेट कैंसर और स्तन कैंसर का ख़तरा कम करती है. एक अन्य अध्ययन से पता चला है कि कॉफ़ी अल्ज़ाइमर से भी सुरक्षा प्रदान करती है.

लेकिन कॉफ़ी पीना एक लत भी हो सकता है. ब्रिटेन डाइटिक एसोसिएशन में रजिस्टर्ड डाइटिशियन गेनॉर बसेल का कहना है कि हम सभी को अपने शरीर का ध्यान रखते हुए संयम से कॉफ़ी पीने की कोशिश करनी चाहिए.

उन्होंने कहा, "अलग-अलग लोगों की सहनशीलता अलग-अलग होती है. कुछ लोगों में कैफ़ीन की प्रतिक्रिया तेज़ होती है और कुछ में नहीं होती. ये सिर्फ़ अपनी सीमा और अपने शरीर को जानने-समझने की बात है."

आम तौर पर सलाह ये है कि एक दिन में चार या पाँच कप कॉफ़ी पीना सुरक्षित होता है, जो 400 मिलीग्राम कैफ़ीन के बराबर होता है. फ़ूड स्टैंडर्स एजेंसी ने कॉफ़ी पीने में संयमित और संतुलित रुख़ अपनाने की सलाह दी है.

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