अपने आप साफ़ होने वाला सूती कपड़ा

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Image caption चीन में इन कपड़ों का परीक्षण सफल रहा है

ख़ुद ही गंदगी साफ़ कर लेने वाले सूती कपड़े बनाने की कोशिशें चीन में सफल होती दिख रही है.

इंजीनियरों ने एक इस तरह का रासायनिक लेप तैयार किया है जिसकी मदद से सूती कपड़ों पर जब सूर्य की रोशनी पड़ती है तो दाग़-धब्बे ख़ुद ही साफ़ हो जाते हैं और उनसे दुर्गंध भी निकल जाती है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि ऐसा करना सस्ता है, इसमें कोई विषैला रसायन नहीं है और ये पर्यावरण के लिए भी नुक़सानदायक नहीं है.

शोध

शंघाई के जियाओ तोंग विश्वविद्यालय और हूबेई विश्वविद्यालय के इंजीनियरों ने ये शोध किया जिसके नतीजे अप्लाइड मटीरियल्स ऐंड इंटरफ़ेसेज़ जर्नल में छपे हैं.

इस शोध के तहत टाइटेनियम डाइऑक्साइड पर ध्यान दिया गया है जो जैविक प्रदूषकों को हटाने में एक अहम कैटेलिस्ट या उत्प्रेरक का काम करता है.

इस तरह का पदार्थ पहले से ही ख़ुद को साफ़ करने सकने योग्य खिड़कियों, दुर्गंध मुक्त मोज़ों और बाथरूम के टाइल्स में इस्तेमाल होता है.

शुरुआत में इसका इस्तेमाल सूती कपड़ों में करने की कोशिशों को सीमित सफलता ही मिली क्योंकि उसके ख़ुद को साफ़ कर लेने वाले गुण सिर्फ़ पराबैंगनी किरणों में ही काम कर पाते थे.

मगर इसके बाद जब टाइटेनियम डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन के मिश्रण में ट्राइएथिलेमाइन मिलाया गया और उसे सामान्य तापमान पर 12 घंटों तक हिलाया गया. इसके बाद उस तरल को 100 डिग्री सेल्सियस पर छह घंटों तक गर्म भी किया गया.

इसके बाद सूती कपड़ों को उस मिश्रण में डुबाया गया फिर निचोड़कर सुखाया गया, गर्म किया गया और गर्म पानी में डुबाया गया.

इसके बाद उस पर सिल्वर आयोडाइड के कण छिड़के गए जो रोशनी की मदद से होने वाली प्रतिक्रिया को बढ़ावा देता है.

इस प्रयोग का प्रभाव देखने के लिए इंजीनियरों ने कपड़े पर नारंगी रंग का दाग़ लगाया और उसे सूरज की रोशनी में डाल. टीम ने बताया कि दो घंटे बाद 71 प्रतिशत दाग़ हट गए थे.

ये प्रयोग उसी कपड़े पर पाँच बार किए गए और उसमें कोई नुक़सान नहीं हुआ जिससे पता चला कि ये एक स्थिर प्रक्रिया थी. धोने या सुखाने से इस पदार्थ के प्रभाव पर कोई असर नहीं पड़ा.

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