खुलकर कहें 'तुम मोटे हो'

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Image caption कमर पर चर्बी से कई तरह की स्वास्थ्य मुश्किलें बढ़ जाती हैं

अगर आप अपने किसी क़रीबी को अब तक ये बताने से झिझकते रहे कि वे मोटे हैं, तो मौके का फ़ायदा उठाइए और ये काम इस क्रिसमस पर कर डालिए.

क्रिसमस का त्योहार कई लोगों के लिए बिना रोक-टोक खाने-पीने का मौका होता है, लेकिन ब्रिटेन में स्वास्थ्य विशेषज्ञों का तो यही मानना है कि किसी अज़ीज़ को वज़न घटाने के लिए टोकने का सबसे सही समय क्रिसमस है.

ब्रिटेन के राष्ट्रीय मोटापा फ़ोरम और कार्डियोमेटाबॉलिक रिस्क पर अंतरराष्ट्रीय पीठ का कहना है कि मोटापे से जुड़े स्वास्थ्य ख़तरों की वजह से इस मामले में सीधी-सपाट बात करना ज़रूरी है.

ज़रूरत से ज़्यादा वज़न, ख़ासकर कमर पर चर्बी चढ़ने से मधुमेह, दिल की बीमारी और स्ट्रोक का ख़तरा बढ़ जाता है.

सर्वेक्षण

लेकिन ब्रिटेन के राष्ट्रीय मोटापा फ़ोरम और कार्डियोमेटाबॉलिक रिस्क पर अंतरराष्ट्रीय पीठ द्वारा एक सर्वेक्षण में पाया गया कि अधिकतर लोग इस मुद्दे पर बात करने से हिचकिचाते हैं.

इस सर्वेक्षण में दो हज़ार से ज़्यादा लोगों शामिल थे. इसमें पाया गया कि 18 से 24 साल की उम्र वाले 42 प्रतिशत लोग अपने अज़ीज़ों को वज़न कम करने के लिए नहीं कहेंगे क्योंकि वे उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने से डरते हैं.

सर्वे में पाया गया कि 25 से 44 साल के बीच लोगों में एक तिहाई से कुछ ज़्यादा और उससे बड़ी उम्र में हर चार में से एक व्यक्ति किसी क़रीबी को वज़न कम करने की सलाह नहीं देगा.

ये भी सामने आया कि पुरुषों को अपने जीवनसाथी से और महिलाओं को अपनी किसी मित्र के साथ ये मुद्दा उठाने में सबसे ज़्यादा मुश्किल होती है.

साधारण बदलाव

विशेषज्ञ मानते हैं कि क्रिसमस पर जब परिवार और दोस्त एक साथ होते हैं तब ये मौका नहीं गंवाना चाहिए.

राष्ट्रीय मोटापा फ़ोरम के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर डेविड हास्लाम का कहना था, “किसी से ये कहना कि उन्हें वज़न घटाने के बारे में सोचना चाहिए, आसान नहीं होता. लेकिन आप ये संवेदनशीलता से करें तो इस मुद्दे पर अब चर्चा करने से बाद के वर्षों में गंभीर स्वास्थ्य ख़तरों से बचा जा सकता है.”

'कार्डिओमेटाबॉलिक रिस्क' पर अंतरराष्ट्रीय पीठ के डा. जीन पियरे डेस्प्रेस भी इस बात से इत्तेफ़ाक़ रखते हैं.

डा. डेस्प्रेस कहते हैं, “शुरुआत में उस व्यक्ति को अपनी जीवनशैली में साधारण बदलाव करने के लिए प्रोत्साहित करें. उन्हें पहले से अधिक सक्रिय बनने, खाने-पीने की आदतों में छोटे-मोटे बदलाव और मीठे पेयों की जगह पानी पीने की सलाह दें.”

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