फ्रांस ने `ब्रेस्ट इमप्लांट' हटाने को कहा

इंप्लांट इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption फ्रांस सरकार का कहना है कि इसमें कैंसर का खतरा नहीं है

फ्रांस के अधिकारियों ने 30,000 महिलाओं को सलाह दी है कि वह अपने दोषपूर्ण 'ब्रेस्ट इमप्लांट' को एहतियात के तौर पर हटा लें.

'ब्रेस्ट इमप्लांट' का उपयोग महिलाएँ अपने स्तन का आकार बढ़ाने और सुधारने के लिए करती हैं.

सरकार का कहना है कि इससे कैंसर होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है. उसने कहा है कि वह इसका खर्च उठाएगी.

फ्रांस की कंपनी पॉली इमप्लांट प्रोथीज़ (पीआईपी) के 'इमप्लांटों' पर पिछले साल प्रतिबंध लगाया गया था जब उनमें गै़र चिकित्सीय श्रेणी वाला सिलिकॉन पाया गया था.

यह माना जाता है कि ब्रिटेन की 40,000 महिलाओं ने यह इमप्लांट लगवाए हैं. लेकिन ब्रिटेन सरकार ने फ्रांस की तरह कोई कदम उठाने से इंकार किया है.

ब्रिटेन की दवाइयों पर नज़र रखने वाली संस्था ने कहा है कि इमप्लांटो की सुरक्षा को लेकर कोई चिंता नहीं है लेकिन इन लोगों को अपने डॉक्टरों से मिलने को कहा गया है.

'ख़तरा'

फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि पीआईपी के इमप्लांटो को लगाने वाली महिलाओं को दूसरी कंपनियों के इमप्लांटो की तुलना में केंसर का खतरा ज़्यादा नहीं है लेकिन इनके 'रपचर' यानि क्षतिग्रस्त हो जाने का ख़तरा साबित हो चुका है.

स्वास्थ्य मंत्री ज़ेवियर बरट्रांड ने फ्रांस की महिलाओं को अपने इमप्लांटो को एहतियातन हटाने के लिए कहा है लेकिन उन्होंने कहा कि यह तुरंत करवाना आवश्यक नहीं है.

सरकार 'करेक्टिव सर्जरी' का खर्च उठाएगी लेकिन केवल उन मामलों में जहाँ इसे स्तन केंसर के उपरांत 'रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी' के तहत लगाया गया था.

इमप्लांट का उपयोग करने वाली महिलाओं में आठ केंसर के मामले सामने आए हैं लेकिन फ्रांस की सरकार का कहना है कि यह ज़रूरी नहीं है कि यह दोषपूर्ण इमप्लांटों से जुड़े हों.

फ्रांस में लगाए गए 30,000 इमप्लांटों में से एक हज़ार से ज़्यादा क्षतिग्रस्त हुए हैं.

संबंधित समाचार