'कार्बन के उत्सर्जन से होगी हिमयुग में देरी'

हिमयुग
Image caption वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्सर्जन की वजह से हिमयुग देर से शुरू होगा.

वैज्ञानिकों का कहना है मानव द्वारा किए जा रहे कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के कारण द्वितीय हिमयुग आने में देरी हो सकती है.

पिछला हिमयुग लगभग 11,500 साल पहले आया था लेकिन अगले के समय के बारे में कुछ साफ नहीं है.

विज्ञान जगत की पत्रिका 'नेचर जिओसाइंस' में वैज्ञानिकों ने लिखा है कि अगला हिमयुग 1500 सालों के दौरान आएगा. लेकिन उत्सर्जन की मात्रा इतनी अधिक है कि इसमें देरी होने की संभावना है.

कैंब्रिज विश्वविद्यालय के ल्युक स्किनर ने कहा कि अगर उत्सर्जन अब रुक भी जाते हैं तो भी कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर को नीचे आने में काफ़ी वक्त लगेगा.

कार्बन डाइऑक्साइड का वर्तमान स्तर 390 भाग प्रति मिलियन (पीपीएम) है.

अन्य शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर उत्सर्जन फ़ौरन भी रुक जाता है तो भी पहले का जमाव लगभग 1,000 साल तक मौजूद रहेगा और समुद्र की सतह में इतना ताप मौजूद है जो ध्रुव पर मौजूद बर्फ़ को पिघलाता रहेगा जिससे समुद्र के जल का स्तर ऊपर जाएगा.

कारण

हिमयुग से 'इंटरग्लेशियल' यानि हिमनदीय और फिर वापस हिमयुग में बदलने का मुख्य कारण धरती के कक्ष में होने वाले परिवर्तन हैं.

इन परिवर्तनों में धरती के सूर्य के आसपास परिक्रमा करने का अनोखापन, उसके अक्ष के झुकाव का परिमाण और उसकी धीमी चक्रगति शामिल है.

यह सब कुछ हज़ारों सालों के अंतराल पर होता है.

लेकिन लगभग एक लाख सालों के अंतराल पर वो किस तरह से धरती के जलवायु को उष्ण हिमनदीय से शीत हिमयुग में तबदील करता है इसके सटीक कारणों का कुछ पता नहीं है.

अपने बलबूते उनमें ये क्षमता नहीं है कि वो वैश्विक तापमान के अंतर को दोनों स्थितियों यानी हिमयुग और हिमनदीय युग में दस डिग्री सेंटीग्रेड का अंतर ला सकें.

हालांकि शुरु के कुछ बदलावों पर कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन जैसे कारणों से प्रभाव पड़ता है.

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