'बदलने होंगे व्यापार के तरीके'

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Image caption इस पैनल के 22 सदस्य में भारत के ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश समेत अलग अलग देशों के मंत्री शामिल हैं.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार बढ़ती हुई असमानता, पर्यावरण के बिगड़ने और 'डगमगाती' अर्थव्यवस्थाओं के चलते दुनिया को अपने व्यापार करने के तरीकों को बदलना होगा.

रिपोर्ट का कहना है कि स्वास्थ्य और शिक्षा को सुधारना होगा. जीवाश्म ईंधन पर दिए जाने वाली आर्थिक सहायता को बंद करना होगा और सरकारों को आर्थिक संकेतों के लिए जीडीपी से आगे देखना होगा.

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने 'ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी' पर इस उच्च स्तरीय समिति का गठन साल 2010 में किया था.

इस रिपोर्ट पर जून में होने वाले रियो प्लस 20 शिखर सम्मेलन में चर्चा होगी.

इसे अदीस अबबा में फ़िनलैंड के राष्ट्रपति तर्जा हेलोनेन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब ज़ूमा जारी करेंगे.

जैकब जूमा ने कहा, ''दुनिया के मंदी में दोबारा खिसकने की संभावना को देखते हुए नीतियाँ बनाने वाले बड़ी बेसब्री से ऐसी सुझावों की तलाश कर रहे हैं जिनसे उन्हें इस मुश्किल स्थिति से बाहर निकाला जा सके.''

उन्होंने कहा, ''हमारी रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि दुनिया में फ़ैले संकट को देखते हुए कायम रहने वाला विकास अब पहले से अधिक ज़रूरी है.''

हेलोनेन ने ज़ोर दिया कि पूरी रिपोर्ट में विषय है समानता, चाहे वो लिंग की बात हो या अधिक और कम आय के बीच का बढ़ता अंतर कम करने की.

उन्होंने कहा, ''गरीबी को दूर करना और समानता दुनिया के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए.''

इस पैनल के 22 सदस्यों में भारत के विकास मंत्री जयराम रमेश समेत अलग अलग देशों के मंत्री शामिल हैं.

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