'मस्तिष्क में गड़बड़ी से लगती है नशे की लत'

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Image caption लाल हिस्से मस्तिष्क का वो हिस्सा दिखाते हैं जो नशे के आदी लोगों में ज़्यादा सक्रिय होते हैं. नीले हिस्से ऐसे लोगों में काफ़ी सिकुड़े होते हैं.

कैंब्रिज विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के अनुसार कुछ लोगों के मस्तिष्क में गड़बड़ी की वजह से उनके नशीले पदार्थों के सेवन का आदी बनने की आशंका ज़्यादा होती है.

मगर साथ ही इन वैज्ञानिकों ने ये भी पाया कि नशे के आदी हो चुके लोगों के ऐसे भाई-बहन जो इन चीज़ों से दूर ही रहे उनका दिमाग़ भी वैसा ही असामान्य था.

इसके बाद कुछ विशेषज्ञ ये मान रहे हैं कि नशे का शिकार नहीं हुए ये भाई-बहन इन मामलों में उम्मीद की एक किरण हो सकते हैं क्योंकि उनका अध्ययन करके ये जाना जा सकता है कि उन्होंने 'आत्म नियंत्रण' के ज़रिए कैसे ख़ुद को नशे से दूर रखा.

ये अध्ययन साइंस पत्रिका में छपा है और इसका कहना है कि नशे का आदी होना कुछ हद तक 'दिमाग़ के असामान्य' होने पर भी निर्भर करता है.

अभी तक ये तो पता था कि नशे के आदी लोगों का मस्तिष्क बाक़ी लोगों के मस्तिष्क से अलग होता है मगर विशेषज्ञ ये नहीं तय कर पा रहे थे कि मस्तिष्क में असमान्यता नशे की वजह से होती है या फिर नशे के आदी लोगों का मस्तिष्क पहले से ही असामान्य होता है.

इसी का उत्तर ढूँढ़ने के लिए नशीले पदार्थों का इस्तेमाल करने वाले 50 लोगों के दिमाग़ का तुलनात्मक अध्ययन उनके ऐसे भाई-बहनों से किया गया जिन्होंने कभी नशा नहीं किया.

नतीजा ये मिला कि नशे के आदी लोगों और नशा नहीं करने वाले उनके भाई-बहनों के व्यवहार को नियंत्रित करने वाले मस्तिष्क के हिस्से एक जैसे ही असामान्य थे.

असामान्य मस्तिष्क

इसके बाद ये माना जा रहा है कि नशे के आदी लोगों का दिमाग़ पहले से ही असामान्य था.

अध्ययन करने वाले दल की प्रमुख शोधकर्ता डॉक्टर कैरेन एर्श ने कहा, "ये काफ़ी पहले से पता था कि हर व्यक्ति जो नशा करता है वो उसका आदी नहीं हो जाता मगर ये दिखाता है कि नशे का आदी होना जीवनशैली पर निर्भर नहीं करता बल्कि ये असामान्य मस्तिष्क की वजह से होता है और हमें ये मानना होगा."

मगर नशे के आदी लोगों के सामान्य भाई-बहनों के मस्तिष्क भी उसी तरह असामान्य थे फिर भी उनका जीवन बिल्कुल अलग पाया गया.

इस पर डॉक्टर कैरेन कहती हैं, "ये भाई-बहन जो नशे के आदी नहीं हैं वे हमें बता सकते हैं कि इस समस्या से कैसे उबरा जा सकता है. उन्होंने आख़िर अपने जीवन में आत्म नियंत्रण का इस्तेमाल कैसे किया."

वैसे संभव ये भी है कि जिस तरह नशे के आदी लोगों और उनके भाई-बहनों के दिमाग़ में एक जैसी असामान्यता दिखी है वो आनुवांशिक न होकर एक जैसे ही पारिवारिक माहौल में पले-बड़े होने की वजह से हो.

यानी नशे के आदी और मस्तिष्क की संरचना का अध्ययन अभी ख़त्म नहीं हुआ है.

डर्बीशर मेंटल हेल्थ ट्रस्ट के मुख्य फ़ार्मासिस्ट डेविड ब्रैनफ़र्ड ने कहा, "इस अध्ययन का मतलब ये है कि नशे के आदी होने की वजह से मस्तिष्क में बड़े बदलाव नहीं आते यानी नए उपचार के तरीक़ों की राह निकल सकती है."

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