प्रेमिका को रिझाने के लिए तोहफ़े ऐसे भी!

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Image caption नर मकड़ी मादा को आकर्षित करने के लिए तोहफ़े के लिए रेशम की थैली बुनते हैं.

सदियों से भावी साथी को आकर्षित करने के लिए तरह-तरह के तोहफ़ों का इस्तेमाल किया गया है. लेकिन ये चलन सिर्फ़ इंसानों में ही नहीं बल्कि जानवरों में भी प्रचलित है.

वन्य जगत में भी विभिन्न जातियां और प्रजातियां इस काम के लिए अजीबो-ग़रीब तोहफ़े इस्तेमाल करती हैं.

सुगंधित पैकेज

ब्राज़ील में मकड़ी की एक प्रजाति, पाराट्रेकालिया ओरनाटा के नर, मादा को आकर्षित करने के लिए रेशम की थैली में लपेटकर शिकार देते हैं. मकड़ियों के विशेषज्ञ, डा. लुइज़ कोस्टा-श्मिट के अध्ययन के मुताबिक, दक्षिण अमरीकी मकड़ी की इस प्रजाति के नर थैली बुनने में एक ख़ास रसायन फ़ीरोमोन का इस्तेमाल करते हैं.

इसके चलते मादा मकड़ी के उस नर मकड़ी को अपना साथी बनाने की संभावना बढ़ती है.

इसी तरह घास में पाई जाने वाली यूरोप की मकड़ी की एक प्रजाति पिसौरा मीराबिलिस के नर भी तोहफ़ा रेशम की थैली में बाँध कर देते हैं.

लेकिन हमेशा ही इनमें खाने की कोई स्वादिष्ट वस्तु नहीं होती. बल्कि कई बार इस आकर्षक पैकेज में सिर्फ़ सूखी घास या पौधे का कोई हिस्सा भी हो सकता है.

ब्राज़ील की इस अध्ययन टीम के एक अन्य सदस्य, पेद्रो एरे डिस्कोज़ी ब्रुम कहते हैं, "अगर नर मकड़ी को 'रिसेप्टिव' या रज़ामंद मादा मिल जाती है लेकिन उसके पास उस समय कोई शिकार नहीं होता तो उस समय वह नर कोई अन्य वस्तु रेशम की थैली में रखकर दे देता है. मादा को रिझाने की कोशिश के शुरुआती दिनों में उस नर के मादा द्वारा चुने जाने की ओर ये एक अहम कदम हो सकता है."

फ़्रूट फ़्लाई (ड्रॉसोफ़ीलिया सबोबस्कूरा) प्रजाति में नर मक्खी भावी साथी के लिए तोहफ़ा महज़ उगल देते हैं.

पक्षी जगत

पक्षी जगत में नर किंगफ़िशर बहुत सोच-समझ कर तोहफ़े चुनने के लिए जाने जाते हैं.

नर किंगफ़िशर मादा को मछली तोहफ़े के रूप में देते हैं. लेकिन मादा का आकर्षित होना इस बात पर निर्भर करता है कि वो मछली उसे किस तरह पेश की गई है.

इसके लिए नर किंगफ़िशर मछली इस तरह से निगलता है जिससे उसे उगलते समय चोंच से मछली का सिर पहले बाहर आए.

वाइल्डलाइफ़ फ़ोटोग्राफ़र चार्ली हैमिल्टन जेम्स कहते हैं कि मादा किंगफ़िशर मछली के नाप और प्रजाति पर ध्यान देती है. इसलिए अगर तोहफ़ा छोटी मछली का हो, तो उसे अकसर नज़र अंदाज़ कर दिया जाता है.

हैमिल्टन ये भी कहते हैं कि इस बहुरंगीय पक्षी का नर हमेशा ही बहुत धैर्य से काम नहीं लेता. नर किंगफ़िशर लगभग 10 मिनट तक ही मादा की प्रतिक्रिया का इंतज़ार करता है और अगर मादा दिलचस्पी नहीं दिखाती, तो वो ख़ुद ही मछली खा लेता है.

कई बार तो मादा के मांगने के बावजूद नर किंगफ़िशर उसके सामने ही मछली खा लेता है.

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वहीं ब्लू मैनाकिन नाम के पक्षियों में कई नर समूह बनाकर एक अकेली मादा के लिए नृत्य करते हैं. लेकिन फिर समूह का नेता बाकी नर पक्षियों को हटाकर मादा के साथ संबंध बनाता है.

बफ़ ब्रैस्टिड सैंडपाइपर्स में मादा को आकर्षित करने के लिए नर अपनी बगल (आर्मपिट्स) दिखाता है.

इंतज़ार की रणनीति

बात अगर चिंपाज़ी की करें तो अमरीका के आयोवा स्टेट विश्वविद्यालय में मानव वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर जिल प्रुएटेज़ सेनेगल के सवानाह जंगलों में चिंपाज़ियों पर अध्ययन कर रही हैं.

पिछले साल उनके दल ने पाया कि नर चिंपाज़ी उन मादाओं के साथ जंगली पौधे और मांस बाँटते हैं जो उनके परिवार की नहीं हैं. हालांकि भोजन बाँटने की इस प्रक्रिया के बाद भी ज़रूरी नहीं कि नर चिंपाज़ी मादा के साथ संबंध बना पाए.

इसी तरह अमरीका के ड्यूक विश्वविद्यालय के 2010 के एक अध्ययन में भी पाया गया था कि पूर्वी अफ़्रीका में नर चिंपाज़ी की इस उदारता के प्रति मादा की कोई 'प्रतिक्रिया' नहीं थी.

लेकिन क्रिस्टिना गोम्स और क्रिस्टोफ़ बोएश का अध्ययन इस ओर इशारा करता है कि हो सकता है कि ये नर चिंपाज़ी की लंबे समय के लिए एक रणनीति हो.

आइवरी कोस्ट के टाई फ़ोरेस्ट रिज़र्व में अध्ययन कर रहे गोम्स और बोएश ने पाया कि नर चिंपाज़ियों के लंबे समय तक एक मादा के साथ मांस बाँटने से नर के उस मादा के साथ संबंध बनाने की संभावना बढ़ जाती है.

वैसे बात जब वन्य जगत के जीवों की अपना प्रेम दिखाने की हो, तो भले ही चुनाव का अधिकार मादा का हो लेकिन ये तो मानना पड़ेगा कि नर के पास भी तरक़ीबों की कमी नहीं होती.

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