बदला कोक और पेप्सी का फॉर्मूला

 शुक्रवार, 9 मार्च, 2012 को 12:56 IST तक के समाचार

कोक और पेप्सी बनाने वाली कंपनियों का दावा है कि रेसिपी बदलने के बावजूद लोगों को स्वाद में कोई फर्क नहीं महसूस होगा.

कोका कोला और पेप्सी बनाने वाली कंपनियां अब अपने पेय की रेसिपी (बनाने का तरीका) बदल रही हैं ताकि उन्हें कैंसर से जुड़ी एक चेतावनी बोतल पर ना छापनी पड़े.

अमरीका के कैलिफोर्निया राज्य के मुताबिक कोक और पेप्सी में ऐसे पदार्थ का इस्तेमाल किया जाता है जिससे कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है.

राज्य के कानून के मुताबिक या तो कंपनिया अपने पेय में इस पदार्थ की मौजूदगी की चेतावनी बोतल पर छापें या पेय बनाने का तरीका बदलें.

इसलिए कंपनियों ने कैलिफर्निया राज्य में अपनी रेसिपी बदल दी है और अब इसे पूरे अमरीका में लागू किया जा रहा है.

नई रेसिपी

पेय बनाने के नए तरीके में कोका कोला और पेप्सी का रंग लाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला पदार्थ (4-मिथाइलीमिडाजोल) की मात्रा कम की जाएगी.

"हमने अपने अधिकारियों को पेय बनाने का तरीका इसलिए बदलने को कहा ताकि उन्हें वैज्ञानिक रूप से अपुष्ट चेतावना ना छापनी पड़े."

डायना गार्जा-सियारलान्ते, कोका कोला

एक शोध के मुताबिक इस पदार्थ के सेवन से चूहों में कैंसर का संबंध तो साबित हुआ है लेकिन इससे मनुष्यों के स्वास्थ्य को खतरे की बात अभी पुष्ट नहीं हुई है.

अमरीका के फूड एन्ड ड्रग ऐडमिनिस्ट्रेशन का दावा है कि शोध में इस पदार्थ को जिस मात्रा में चूहों को दिया गया, उस स्तर तक पहुंचने के लिए एक व्यक्ति को कोक या पेप्सी के 1,000 कैन पीने होंगे.

कंपनी के मुताबिक बदलाव को एक राज्य की जगह पूरे देश में लागू करना उनके लिए ज्यादा कार्यकुशल है.

कोका कोला की प्रतिनिधि, डायना गार्जा-सियारलान्ते ने एपी समाचार एजंसी को बताया, “हम नहीं मानते की जनता को हमारे पेय से कोई खतरा है, लेकिन हमने अपने अधिकारियों को पेय बनाने का तरीका इसलिए बदलने को कहा ताकि उन्हें वैज्ञानिक रूप से अपुष्ट चेतावना ना छापनी पड़े.”

कोक और पेप्सी बनाने वाली कंपनियों का दावा है कि रेसिपी बदलने के बावजूद लोगों को स्वाद में कोई फर्क नहीं महसूस होगा.

बेवरेज डाइजेस्ट नामक एक उद्योग पत्रिका के मुताबिक कोका कोला और पेप्सी मिलकर फिजी ड्रिन्क या बुलबुले वाले पेय पदार्थ के बाजार का 90 प्रतिशत नियंत्रित करते हैं.

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