ढाई करोड़ में मंगल की यात्रा?

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Image caption एलोन मस्क मानते हैं कि मंगल ग्रह की यात्रा काफ़ी कम ख़र्चे में संभव हो सकेगी.

रॉकेट उद्यमी एलोन मस्क मानते हैं कि वो मंगल ग्रह पर आने-जाने का ख़र्चा ढाई करोड़ रुपए तक ला सकते हैं.

स्पेसएक्स नाम की कंपनी के सीईओ कहत हैं कि अब उन्हें ये समझ आ गया है कि मंगल भ्रमण की ख़र्चे को कैसे कम किया जा सकता है.

उन्होंने बीबीसी को बताया है कि इस बारे में बाक़ी जानकारी वे इस वर्ष के अंत में या अगले साल के शुरू में ही देंगे.

एलोन मस्क अमरीकी स्पेस एजेंसी नासा के नए व्यवसायिक पार्टनर हैं जो अंतरिक्ष स्टेशनों पर सामान और अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने के लिए उपरकरण बनाते हैं.

इसके उन्होंने अपना एक रॉकेट भी बनाया है.

फ़ॉल्कन 9 नाम के इस रॉकेट और ड्रैगन नाम के यान का पहला प्रदर्शन अगले महीने होने वाला है.

बीबीसी के कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए एलोन मस्क ने कहा कि नई तकनीक के विकास से अंतरिक्ष यात्रा की कीमत कम होती जाएगी. उनके अनुसार वो दिन दूर नहीं जब लाल ग्रह के लिए मिशन खर्चे के हिसाब भी एक वास्तविकता बन जाएगी.

दावे पर सवाल

उन्होंने बीबीसी को बताया, “मेरी सोच एक ऐसा रॉकेट सिस्टम बनाने की है जो पृथ्वी से मंगल तक जाएगा. मंगल पर उसमें दोबारा ईंधन भरी जाएगी. ये ज़रुरी है क्योंकि आप मंगल तक ईंधन ढो कर नहीं ले जाना चाहेंगे.”

वो कहते हैं कि ये सिस्टम दोबारा इस्तेमाल करने वाला होना चाहिए ताकि कुछ भी बर्बाद ना हो.

उन्हें यकीन है कि आख़िरकार एक दिन मंगल ग्रह की यात्रा आम आदमी के लिए वास्तविकता बन जाएगी. उनके अनुसार मंगल पर आने-जाने का प्रति व्यक्ति ख़र्चा ढाई करोड़ रुपए तक लाया जा सकता है.

हालांकि उन्होंने ये भी साफ़ किया कि ये शुरूआती कीमत ना होकर, दस वर्ष तक चालू रहने के बाद आने वाला खर्चा होगा. एलोन मस्क ने कहा कि ढाई करोड़ की कीमत दस से पंद्रह सालों के बीच हासिल की जा सकेगी.

उन्होंने कहा, “मंगल पर आने-जाने का ख़र्चा – ढाई करोड़ रूपए. ये संभव है. ”

एलोन मस्क के इस दावे को इस नज़र से देखें कि नासा स्वयं ‘मंगल मिशन’ साल 2030 से पहले नहीं कर पाएगा. और अगर मस्क ये अगले दस से पंद्रह सालों में कर लें तो ये किसी करिश्में से कम नहीं होगा.

कई लोग इस दावे को खोखला कह सकते हैं क्योंकि स्पेसएक्स को अभी बहुत कुछ साबित करना है. कंपनी ने अबतक सात रॉकेट प्रक्षेपित किए हैं जिनमें से पहले तीन विफल रहे हैं.

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