जीन में छिपा हो सकता है मोटापे का राज़

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शोधकर्ताओं के मुताबिक वे इस बात का पता लगाने में कामयाब हो गए हैं कि एक जीन में उत्परिवर्तन या एक बदलाव की वजह से कैसे मोटापा बढ़ सकता है.

चूहों पर हुए प्रयोग से पता चलता है कि अगर उत्परिवर्तन या म्यूटेशन हो जाए तो 'खाना रोकने' का शरीर का संदेश रुक जाता है.

'नेचर मेडिसिन' पत्रिका में छपे अध्ययन के अनुसार भूख से जुड़े हॉर्मोन के प्रति मस्तिष्क का संदेश इस उत्परिवर्तन के बाद बाधित हो जाता है.

जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि इन नतीजों के बाद वज़न रोकने के तरीक़ों में मदद मिल सकती है.

वैसे तो मोटापे से कई जीन्स को जोड़ा गया है मगर जानवरों और मानवों से जुड़े कुछ अध्ययनों में मस्तिष्क से संचालित होने वाले न्यूरोट्रॉफ़िक फ़ैक्टर वाले जीन की भूमिका की चर्चा की जाती है.

वैसे जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं का कहना है कि इस मोटापे और इस उत्परिवर्तन के संबंध का स्पष्टीकरण अभी नहीं मिला है.

प्रयोग के लिए चूहों में कुछ ऐसे आनुवांशिक रूप से बदलाव किए गए जिससे उनमें यह उत्परिवर्तन या म्यूटेशन हो. ऐसे चूहों ने सामान्य चूहों के मुकाबले 80 फ़ीसदी ज़्यादा खाना खाया.

भोजन के बाद इंसुलिन और लेप्टिन जैसे हॉर्मोन्स को मस्तिष्क को ये संदेश देना चाहिए कि अब शरीर की ज़रूरत पूरी हो गई है और अब खाना बंद कर दिया जाना चाहिए.

संदेश

शोधकर्ताओं ने दिखाया कि म्यूटेशन वाले चूहों में ये संदेश ख़ून में मौजूद हॉर्मोन्स से मस्तिष्क के उचित हिस्से में नहीं भेजा गया.

एक शोधकर्ता प्रोफ़ेसर बाओजी शू ने कहा, "अगर बीडीएनएफ़ जीन के साथ कोई मुश्किल हो जाए तो न्यूरॉन एक दूसरे से कोई संपर्क नहीं रख पाते. इन हालात में लेप्टिन और इंसुलिन के संदेश निष्प्रभावी रह जाती है और भूख पर उसका असर नहीं होता."

उन्होंने बताया कि इस खोज के बाद ऐसे तरीके खोजे जा सकते हैं जिससे मस्तिष्क को शरीर के वज़न पर नियंत्रण रखने में मदद मिल सके.

कैंब्रिज विश्वविद्यालय में मोटापे और जीन के संबंध का अध्ययन करने वाले प्रोफ़ेसर सदफ़ फ़ारूक़ी ने बीबीसी को बताया, "जीन की आश्चर्यजनक रूप से काफ़ी प्रभावी भूमिका होती है जिसकी अकसर चर्चा नहीं होती. दो लोगों के वज़न में अंतर के 40 से 70 फ़ीसदी तक मामले आनुवांशिक होते हैं."

उन्होंने बताया कि मस्तिष्क से संचालित होने वाले न्यूरोट्रॉपिक फ़ैक्टर जीन से मोटापे का संबंध दिख चुका है मगर साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि ये अध्ययन सिर्फ़ चूहों पर हुआ है और इस तरह का उत्परिवर्तन लोगों में बहुत कम ही दिखता है.

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