गंजे सिर पर दोबारा उग सकेंगे बाल

 शुक्रवार, 23 मार्च, 2012 को 07:58 IST तक के समाचार

गंजापन पुरुषों में बहुत ही आम बीमारी है.

अमरीकी वैज्ञानिकों ने पुरुषों में गंजेपन के वैज्ञानिक कारण की खोज करने का दावा किया है. यह उम्मीद भी जताई गई है कि इस शोध से गंजेपन को रोकने का इलाज और यहां तक कि बाल को दोबारा उगाना भी संभव हो सकेगा.

गंजे व्यक्ति और प्रयोगशाला में चूहों पर किए गए अध्ययन के आधार पर अमरीकी वैज्ञानिकों ने एक प्रोटीन का पता लगाया है जो कि बालों के झड़ने के लिए जिम्मेदार होता है.

साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन नामक पत्रिका में छपी रिपोर्ट में कहा गया है कि गंजेपन को रोकने के लिए दवाओं की खोज भी जारी है. शोध के बाद गंजेपन को रोकने के लिए एक क्रीम का भी निर्माण हो सकता है.

ज्यादातर पुरुषों में गंजापन उम्र के आधे पड़ाव में होता है, जबकि करीब 80 प्रतिशत पुरुषों में सत्तर साल तक की उम्र में भी मामूली रूप से ही बाल झड़ते हैं.

इस मामले में टेस्टोस्टीरोन नामक सेक्स हॉर्मोन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इनकी वजह से बाल की पुटिकाएं सिकुड़ जाती हैं और धीरे-धीरे इतनी छोटी होती जाती हैं कि उन्हें देखना मुश्किल हो जाता है.

यही स्थिति बाद में गंजेपन के रूप में परिवर्तित हो जाती है.

बालों का दोबारा उगना

लेकिन, अब पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ता ये जानने की कोशिश में लगे हैं कि जब मनुष्य में गंजेपन की शुरुआत होती है तो कौन सा विशिष्ट जीन उसके लिए उत्तरदायी होता है.

शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रोस्टाग्लैंडिन डी सिन्थेज नामक एक खास प्रोटीन कई स्तरों पर गंजे हुए स्थानों पर स्थित बाल पुटिकाओं में इकट्ठा होती हैं. ये प्रोटीन बाल वाली जगहों पर नहीं होती.

"बिल्कुल हम कह सकते हैं कि जब हमने गंजी खोपड़ी में प्रोस्टाग्लैंडिन प्रोटीन दिया तो बालों के उगने की प्रक्रिया शुरू हो गई. इसी से हमने मानव में गंजेपन के इलाज का लक्ष्य सुनिश्चित किया"

प्रो. जॉर्ज कोट्सारेलिस, शोधकर्ता

चूहों की उन प्रजातियों में जिनमें इस प्रोटीन का उच्च स्तर दिया गया, वे पूरी तरह से गंजे हो गए जबकि उन पर उगाए गए मानव बाल इन प्रोटीन्स को देने पर उगने बंद हो गए.

शोध का नेतृत्व कर रहे वैज्ञानिक प्रो. जॉर्ज कोट्सारेलिस बताते हैं, “बिल्कुल हम कह सकते हैं कि जब हमने गंजी खोपड़ी में प्रोस्टाग्लैंडिन प्रोटीन दिया तो बालों के उगने की प्रक्रिया शुरू हो गई. इसी से हमने मानव में गंजेपन के इलाज का लक्ष्य सुनिश्चित किया.”

उनके मुताबिक अगला कदम के तहत उन यौगिकों की पहचान की जाएगी कि ये इस प्रक्रिया को कैसे प्रभावित करता है. साथ में ये भी जानने की कोशिश की जाएगी कि यदि इस प्रक्रिया को रोक दिया जाए तो क्या गंजेपन की विपरीत स्थिति भी आ सकती है.

यानी अगर ये पता चल जाए तो गंजेपन को रोका जा सकता है.

उनका कहना है कि ऐसी तमाम दवाइयों की भी पहचान की गई है जो कि इस चक्र को प्रभावित करती हैं और इनमें से कई का परीक्षण भी हो रहा है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि इस बात की पूरी संभावना है कि सिर के खाल पर लगाने वाली ऐसी दवा बनाई जा सकती है जिससे गंजेपन को रोका जा सके और झड़े हुए बाल दोबारा उग सकें.

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.