नया जबड़ा, नये दांत और जीभ भी नई

Image caption रिचर्ड नौरिस एक दुर्घटना में अपने चेहरे की सुंदरता खो बैठे थे और मास्क लगाकर ही घर से बाहर निकलते थे

अमरीकी डॉक्टरों ने प्रतिरोपण तकनीक के जरिए एक युवक को नया चेहरा दिया है जिसके बारे में उनका दावा है कि ये अपनी तरह का अनूठा मामला है.

मेरीलैंड यूनिवर्सिटी में किए गए इस ऑपरेशन में रिचर्ड नॉरिस नाम के इस व्यक्ति को जो नया चेहरा मिला है, उसमें जबड़ा, दांत और जीभ भी शामिल है.

नौरिस की उम्र 37 वर्ष है और 15 साल पहले एक दुर्घटना में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे. इस वजह से उनका चेहरा इतना बिगड़ गया था कि वो घर से बाहर निकलने से पहले अपने चेहरे पर मास्क लगा लेते थे.

इस सर्जरी के लिए अमरीकी नौसेना ने पैसे दिए थे. नौसेना को उम्मीद है कि ये तकनीक इराक और अफगानिस्तान में घायल होने वाले सैनिकों के लिए मददगार साबित होगी.

नॉरिस का ऑपरेशन करने में डॉक्टरों को 36 घंटे लगे. उनका कहना है कि ये ऑपरेशन प्रतिरोपण के लिए की गई 72 घंटे की सर्जरी का एक हिस्सा था जिसमें एक अंगदान करने वाले एक व्यक्ति के अंगों का इस्तेमाल किया गया. जिन मरीजों को इन अंगों से लाभ मिला, नॉरिस उनमें से एक हैं.

नई मुस्कान

दुर्घटना में नॉरिस अपने होंठ और नाक गवां चुके थे और और उनके मुंह पर बेहद सीमित हरकत नजर आती थी.

लेकिन मुख्य सर्जन का कहना है कि नौरिस को अब अपना जीवन वापस मिल जाएगा.

सर्जन इडुआर्डो रोड्रिग्ज कहते हैं, ''हमारा मकसद था कि मरीज का चेहरा और उससे जुड़े अंग पहले की तरह काम करने लगें और वो देखने में भी अच्छा लगे.''

मेरीलैंड यूनिवर्सिटी के इस दल का कहना है कि नॉरिस अब दाढ़ी बना रहे हैं, अपने दांत भी साफ कर पा रहे हैं और उन्हें अब मुस्कुराने का अहसास भी होता है.

अमरीकी सरकार का अनुमान है कि इस तरह घायल सैनिकों की संख्या 200 है जिनके चेहरे को प्रतिरोपण की जरूरत है.

चेहरे का पहला प्रतिरोपण वर्ष 2005 में फ्रांस में किया गया था जहां एक महिला का चेहरा उसके कुत्ते ने ही चबा लिया था.

स्पेन में वर्ष 2010 में डॉक्टरों ने चेहरे का पहला पूर्ण प्रतिरोपण किया था.

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