बलवान हुआ मलेरिया फैलाने वाला परजीवी

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Image caption मलेरिया की वजह से साल 2010 में दुनियाभर में छह लाख से ज्यादा लोग मारे गए

वैज्ञानिकों की एक ताजा शोध रिपोर्ट में कहा गया है कि मलेरिया फैलाने वाले परजीवी की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ गई है जिससे इस बीमारी को जड़ से खत्म करने में दिक्कतें आ सकती हैं.

उन्होंने पुष्टि की है कि कंबोडिया से लगभग 800 किलोमीटर की दूरी पर थाइलैंड और बर्मा की सीमा पर मलेरिया के ऐसे परजीवी मिले हैं जिन पर दवाओं का कोई असर नहीं हो रहा है.

शोधकर्ताओं के मुताबिक, परजीवी की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने का मतलब ये है कि मलेरिया को जड़ से खत्म करने के प्रयासों को गंभीर झटका लगेगा.

इस शोध का ब्योरा मेडिकल जर्नल 'द लांसेट' में प्रकाशित हुआ है.

मलेरिया की सबसे ज्यादा प्रभावी दवा चीन के एक पौधे 'अर्टेमिसिया अन्नुआ' से बनाई जाती रही है. इसे 'स्वीट वार्मवुड' के नाम से भी जाना जाता है.

चिंता की बात

वर्ष 2009 में शोधकर्ताओं को पता चला कि मलेरिया का सबसे ज्यादा जानलेवा परजीवी, मच्छरों के जरिए फैलता है.

उनका कहना है कि पश्चिमी कंबोडिया के इलाकों में इस परजीवी पर अब दवाओं का असर नहीं हो रहा है.

शोक्लो मलेरिया शोध केंद्र के शोधकर्ताओं ने वर्ष 2001 से वर्ष 2010 की अवधि के दौरान पाया कि मलेरिया के उपचार की दवा पहले के मुकाबले कम प्रभावी साबित हो रही है और जिन मरीजों को ये दवा दी जा रही है, उनमें से 20 प्रतिशत पर इसका असर नहीं हो रहा है.

शोध दल में शामिल प्रोफेसर फ्रैंकोइस नोस्टन का कहना है कि ये बदलाव काफी गंभीर है. वे कहते हैं, ''इससे मलेरिया के निपटने के उपायो को झटका लगेगा और कई नई जगहों पर इसका प्रकोप बढ़ेगा.''

शोध से जुड़े टेक्सास बॉयोमेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट के डॉक्टर स्टैंडवेल खोमा कहते हैं, ''दक्षिण पूर्वी एशिया में मलेरिया के परजीवी की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने से वहां लाखों लोग इस बीमारी की वजह से मारे जा सकते हैं.''

विश्व मलेरिया रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2010 में मलेरिया की वजह से दुनिया भर में छह लाख से ज्यादा लोग मारे गए थे. इनमें ज्यादातर गर्भवती महिलाएं और बच्चे शामिल थे.

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