कैसे बंटा था परमाणु

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Image caption अर्नेस्ट वाल्टन ने 14 अप्रैल को ही परमाणु का कृत्रिम विभाजन किया था जिसे परमाणु युग की शुरूआत माना जाता है.

अस्सी साल पहले 14 अप्रैल के दिन कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के दो वैज्ञानिकों ने विज्ञान के इतिहास में पहली बार किसी परमाणु को दो भागों में बांटा था.

वैज्ञानिक जॉन कॉक्रॉफ्ट और अर्नेस्ट वाल्टन को बाद में उनके काम के लिए नोबेल समेत दूसरे पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था.

आयरलैंड के शहर डब्लिन में इसी दिन की याद में एक समारोह आयोजित किया जा रहा है जब विज्ञान के क्षेत्र में वैज्ञानिकों को एक शानदार उप्लब्धि प्राप्त हुई थी.

डब्लिन विश्वविद्यालय के एक लेक्चर थिएटर में हो रहे समारोह में वैज्ञानिको और शोधकर्ताओ की भीड़ अर्नेस्ट वाल्टन के जीवनकाल के बारे में सुनने के लिए पहुंच रही है.

अर्नेस्ट वाल्टन और उनके साथी जॉन कॉक्रॉफ्ट को ये उप्लब्धि 14 अप्रैल साल 1932 में मिली जब उन्होंने प्रोटोन गतिवर्धक की मदद से एक परमाणु नाभिक को कृत्रिम तरीके से विभाजित कर दिया.

हालांकि इस काम के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार कई साल बाद साल 1951 में ही दिया जा सका.

वाल्टन के बेटे फिलिप के मन में उस पुरस्कार समारोह की यादें आज भी ताजा है. फिलिप उस समय बोर्डिंग स्कूल में थे, उसी स्कूल में जहां उनके पिता भी पढ़ चुके थे.

फिलिप ने बताया, “मेरी मां ने मुझसे फोन पर कहा कि पिताजी को काफी सम्मानजनक नोबेल पुरस्कार दिया गया है. मै उस समय 11 साल का था. जाहिर सी बात है कि नोबेल के बारे में तब मै जानता भी नहीं था. अगले ही दिन हमारे स्कूल में नोबेल पुरस्कार मेरे पिता को दिए जाने की घोषणा हुई और आधे दिन की छुट्टी दे दी गई. ये मेरे लिए गर्व की बात थी. मैने सबसे कहा कि मेरे पिता की वजह से आज सबको आधे दिन की छुट्टी मिली है.”

'पढ़ाना पसंद था'

अर्नेस्ट वाल्टन के चारों बच्चो ने विज्ञान के क्षेत्र में जीविका तलाशी. फिलिप वाल्टन भी आयरलैड के नेशनल विश्वविद्यालय में भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर हैं.

फिलिप वाल्टन का कहना है कि उनके पिता ने भले कितनी ही बड़ी खोज की हो लेकिन उनके पढ़ाने का शौक कभी कम नहीं हुआ.

फिलिप के अनुसार अर्नेस्ट वाल्टन एक बेहतरीन शिक्षक थे जिन्हें हर स्तर के विद्यार्थी को पढ़ाना पसंद था.

उनका कहना है कि कई लोग उनके पास ये बताने आते है कि फिलिप के पिता ने उन्हें पढ़ाया.

अर्नेस्ट वाल्टन के गृह नगर में उनकी उपलब्धि को भूला नहीं गया है. इस सप्ताह डब्लिन में ऐसे कई समारोह आयोजित किए जाएंगे जिसमे परमाणु युग की शुरूआत को याद किया जाएगा.

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