शोध दिलचस्प पर व्यापक बनाने की जरूरत: विशेषज्ञ

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Image caption शोध के मुताबिक हल्दी दिल के रोगियों के लिए बहुत लाभदायक है

थाइलैंड के एक विश्वविधालय में हुए शोध से संकेत मिले हैं कि बायपास सर्जरी कराने वाले हृदय रोगियों के लिए हल्दी का प्रयोग फायदेमंद साबित हो सकता है और वो दिल के दौरे से बच सकते हैं.

शोध पर दिल्ली स्थित ह्रदय रोग के प्रोफेसर एसएस रिस्साम कहते हैं:

"ह्रदय रोग में हल्दी के इस्तेमाल से लाभ पर थाइलैंड में किया गया शोध दिलचस्प है. लेकिन सवाल ये है कि दवा बनाने वाली बड़ी कंपनियाँ कम खर्च में इलाज के इस तरह के नुस्खों को पनपने भी देंगी या नहीं.

'अमेरिकन जनरल ऑफ कार्डियोलॉजी' में छपे इस शोध के नतीजे आपको भारतीय प्रायद्वीप में सदियों पुराने घरेलू इलाज की याद दिलाते हैं.

मां, दादी-नानी या घर के बुजुर्ग चोट लगने पर हल्दी का लेप लगा देते थे, या फिर दूध में हल्दी मिलाकर पिला देते थे.

इस क्षेत्र में हमेशा से हल्दी की गुणवत्ता को महत्व दिया जाता रहा है. थाइलैंड के चियांग माई विश्वविद्यालय ने इस शोध के तहत हल्दी की विशेषता को वैज्ञानिक तरीके से साबित करने की कोशिश की है.

मुनाफे का सवाल

हालांकि इस शोध को और अधिक पुष्ट किए जाने की जरूरत है.

साथ ही 'सैम्पल साईज' यानी कि जितने लोगों पर शोध किया गया (इस शोध में 121), उसे और व्यापक करने की जरूरत है लेकिन दिक्कत है कि क्या उसके लिए पैसा मिल पाएगा? कोई इस शोध को बड़े पैमाने पर करने के लिए धन लगाने को तैयार होगा?

इस शोध को कितनी गंभीरता से लिया जाना चाहिए, ये तो तब तय होगा जब इसके सभी पहलुओं की छानबीन व्यापक तरीके से होगी.

दवाओ और उपचार के क्षेत्र में रिसर्च के लिए अधिकतर धन दवा बनाने वाली बड़ी कंपनियां मुहैया कराती हैं.

परेशानी ये है कि जहां इस तरह के उपचार की बात आती है जब इलाज सस्ते में हो सकता हो तो कई बार वो थोड़े समय के बाद अपना हाथ खींच लेती हैं.

क्योंकि अगर इलाज सस्ते में होने लगा तो इसका असर सीधा-सीधा मुनाफे पर होगा.

उदाहरण

अगर किसी तरह इस तरह की दवा या उपकरण बाजार में आ भी जाते हैं तो दवा और चिकत्सकीय उपकरण बनाने वाली बड़ी कंपनियों को खतरा लगने लगता है.

तमाम कोशिशों के बाद बड़ी कंपनियों ने सस्ते पेसमेकर्स को बाजार से उखाड़ फेंका.

ह्रदय रोग से ही संबंधित राजू-कलाम कोरोनरी स्टेंट का हाल भी कुछ अलग नहीं.

हैदराबाद स्थित निजाम इंस्टीच्युट ऑफ मेडिकल साइंसेस के डाक्टर राजू ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति अबुल कलाम की वैज्ञानिक सलाह पर दिल के पास की रक्तवाहनियों को खोलने के लिए इस्तेमाल किए जानेवाला उपकरण स्टेंट तैयार किया था लेकिन बात बहुत आगे तक जा ही नहीं पाई."

(बीबीसी संवाददाता फैसल मोहम्मद अली से बातचीत पर आधारित)

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