पाकिस्तानी मूल के ब्रितानी आनुवांशिक विकार के शिकार

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पाकिस्तान से ब्रिटेन आकर बसने वाले लोगों की अच्छी खासी तादाद है. लेकिन पाकिस्तानी मूल के ब्रिटेनवासियों में ऐसे बच्चों की संख्या बहुत ज्यादा है जिन्में जन्म से ही आनुवांशिक विकार है.

एक शोध के मुताबिक ब्रिटेन में आम लोगों की तुलना में पाकिस्तानी मूल के लोगों के बच्चों में आनुवांशिक विकार होने की आशंका 13 गुना ज्यादा है.

इसी समस्या पर ध्यान खींचने के लिए पाकिस्तानी मूल के ब्रिटेनवासी ऑक्सफर्ड में एक सम्मेलन कर रहे हैं.

स्वास्थ्य सेवा से जुड़े लोगों में तो इस समस्या को लेकर जागरुकता है लेकिन पाकिस्तानी समुदाय के लोगों ने इसे अब तक ज्यादा तरजीह नहीं दी है.

चचेरे-मौसेरे भाई-बहनों में शादी

माना जाता है कि आनुवांशिक विकार (जेनेटिक डिसऑर्डर) का संबंध एक ही परिवार में चचेरे-मौसेरे भाई-बहनों में शादी करने से भी है.

पाकिस्तान में वृहद परिवार के सदस्यों के बीच शादी होना आम बात है. 1950 और 60 के दशक में जब प्रवासी पाकिस्तान से ब्रिटेन आकर बसे थे तो वे ब्रिटेन में भी इस परंपरा का पालन करते रहे.

शिशुओं में दिगामी विकृत्ति या अन्य तरह की विकलांगता के पीछे के कारणों को भी इस परंपरा से जोड़ कर देखा जाता है.

पीटर कॉरी बच्चों के डॉक्टर हैं जो आनुवांशिक विकार से जुड़ी समस्याओं का इलाज करते हैं.

वे कहते हैं, “चचेरे मौसेरे भाई बहनों में शादी आनुवांशिक विकार का मूल कारण नहीं होती लेकिन ऐसी शादी से इस तरह का विकार होने की आशंका बढ़ जाती है. ऐसे समुदाय जो सैकड़ों वर्षों से इस तरह शादी करते रहे हैं, उनमें ये विकार ज्यादा होता है.”

डॉक्टर कॉरी बताते हैं, “संभवत हर मनुष्य में ऐसा जीन होता है जिससे इस तरह की दिक्कत हो सकती है. लेकिन जब आप किसी ऐसे व्यक्ति से शादी कर लेते हैं जिसमें भी समस्या वाला जीन है तो बच्चा होने पर आशंका रहती है कि शिशु को आनुवांशिक विकार होगा.”

मिलते-जुलते विचार

आयशा अली खान ब्रिटेन के वेस्ट यॉर्कशायर में शिक्षिका हैं. उनके माता-पिता एक ही वृहद परिवार के सदस्य हैं. आयशा के चार भाई-बहन अलग-अलग तरीके से विकलांग हैं.

आयशा कहती हैं कि शुरु शुरु में सब बच्चों को बताया जाता था कि ये तो अल्लाह की मर्जी है.

वे कहती हैं, “हमें कहा जाता था कि ये काले जादू की वजह से हुआ है, कभी कहा जाता था कि मेरी माँ जब गर्भवती थी तो फिसल गई थी जिस वजह से बड़ी बहन को पढ़ने-समझने में मुश्किल होती है. लेकिन कभी किसी ने नहीं बताया कि ये सब इसलिए हुआ क्योंकि माता-पिता एक ही परिवार के थे.”

हालांकि आयशा अली खान ये भी मानती हैं कि इस तरह की शादियों के फायदे भी हैं जैसे पारिवारिक पृष्ठभूमि और सोच मिलती जुलती होती है.

उन्हें उम्मीद है कि ऑक्सफर्ड के सम्मेलन से पाकिस्तानी मूल के लोगों को ये समझने और परखने का मौका मिलेगा कि ऐसी शादियों में क्या जोखिम है और क्या फायदे हैं.

हालांकि इस विषय पर बात करना काफी संवेदनशील हो सकता है. चार साल पहले ब्रिटेन सरकार के एक मंत्री ने जब इस मुद्दे को उठाया था तो उनकी आलोचना हुई थी और कहा गया था कि वो ‘इस्लामोफोबिक’ हैं.

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