पहले पता चल सकता है किसे होगा स्तन कैंसर

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Image caption अगर खून की जांच करा ली जाय तो समय से पहले स्तन कैंसर का पता चल सकता है.

मानव विज्ञान में एक महत्वपूर्ण शोध हुआ है. अब समय से पहले महिलाओं के स्तन कैंसर के बारे में पता चल जाएगा बस एक विशेष किस्म की रक्त जांच से.

कैंसर रिसर्च पत्रिका ने अपने शोध में कहा है कि इसके लिए कोई बड़ी जांच की जरूरत नहीं है, बल्कि खून की एक छोटी जांच होगी और बता दिया जाएगा कि इस बीमारी की आशंका है भी या नहीं.

खून से होगी जांच

खून जांच के द्वारा यह भी पता चल जाएगा कि कैसे शराब और हार्मोन्स का प्रभाव महिलाओं पर पड़ता है. शोधकर्ताओं के अनुसार जांच की इस प्रक्रिया को इपिजेनेटिक्स कहा जाता है.

शोध से यह भी पता चला है कि पांच में एक महिला में इस तरह के आनुवंशिक तत्व पाए जाते हैं जिसके चलते कैंसर का खतरा दोगुना हो जाता है.

लंदन के इम्पीरियल कॉलेज के वैज्ञानिकों ने इस शोध के लिए अलग-अलग उम्र की 1380 महिलाओं के खून का परीक्षण किया जिसमें स्तन कैंसर के पाए जाने की आशंका थी. बाद में 640 महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर पाया गया.

शोध से यह भी पता चला कि स्तन कैंसर और आणविक सुधार (मोलेक्यूलर मोडिफिकेशन) के बीच गहरा संबध है. यह जीन एकल (सिंगल) होता है जो एटीएम कहलाता है और व्हाइट ब्लड सेल्स में पाया जाता है.

क्या है कारण

अधिक मात्रा में मैथिलेशन पायी जाने वाली महिलाओं का एटीएम जीन ज्यादा प्रभावित होता है और वे कम मात्रा में मैथिलेशन पाए जानेवाली महिलाओं की तुलना में स्तन कैंसर का अधिक शिकार होती हैं.

शोध में यह भी पता चला है कि कुछ मामलों में कैंसर होने की आशंका का अनुमान 11 वर्ष पहले लग सकता है.

जीन परिवर्तन

इस शोध का नेतृत्व करने वाले लंदन के इंपेरियल कॉलेज के डॉक्टर जेम्स फ्लैंगन का कहना है, “हम इस बात को जानते हैं कि जीन में परिवर्तन होने से कई तरह के रासायनिक परिवर्तन होते हैं और वह कई तरह की बीमारियों पर असर डालता है.”

डॉक्टर जेम्स ने बताया, “अब इस शोध के बाद हम बता सकते हैं कि इपिजेनेटिक्स में परिवर्तन होने का भी लोगों के उपर असर पड़ता है.”

बस शुरूआत है

डॉक्टर जेम्स फ्लैंगन का कहना है, “हम आशा करते हैं कि यह शोध कैंसर के उपर किए जा रहे शोध की शुरूआत भर है. लेकिन भविष्य में शोध करनेवालों के लिए चुनौती यह है कि वे नई सूचनाएं अपने शोध में शामिल कर कैसे लाभ उठाते हैं.”

स्तन कैंसर के खिलाफ अभियान चलाने वाले बैरोनेस डेल्थ मोर्गन का कहना है, “ दोनों तथ्यों को एक साथ मिलाकर हम यह देखने की कोशिश करेगें कि इस बीमारी से कैसे निजात पायी जाय और कैसे इतने पहले जानकारी मिलने के बाद उन्हें बचाया जाए.”

इंगलैंड के कैंसर रिसर्च के लोरा बेल का कहना है, “यह शोध हमारे भविष्य के लिए एक प्रकाश पुंज है, जिसकी सहायता से हम अपने भविष्य में बहुत अच्छा कर सकते हैं. हालांकि यह बताना अभी जल्दीबाजी होगी कि हम उनके लिए कितना मददगार हो सकते हैं.”

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