चाँद बिखेरेगा कुछ और चांदनी

सुपरमून
Image caption सुपरमून में चांद धरती के सबसे नजदीक आ जाता है और तब ये अपेक्षाकृत बड़ा और ज्यादा चमकदार नजर आता है.

पूर्णिमा के चांद की चमक यूं तो सबसे ज्यादा होती ही है लेकिन रविवार छह मई को पड़ रही पूर्णमासी को चाँद की चमक और भी ज्यादा होगी क्योंकि रविवार की शाम आकाश में नजर आएगा 'सुपरमून'.

सुपरमून उसे कहते हैं जब चांद धरती के सबसे नजदीक आ जाता है और तब ये अपेक्षाकृत बड़ा और ज्यादा चमकदार नजर आता है.

सुपरमून की स्थिति शनिवार को शुरु हो चुकी है और ये भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में दिखा. लेकिन अगर आप इसे तब देखने से चूक तो निराश न हों क्योंकि ये रविवार को फिर दिखेगा.

मुंबई स्थित नेहरू सेंटर प्लैनिटेरियम में मानद व्याख्याता प्रभु वेलार ने बताया कि भारत में सुपरमून रविवार शाम आठ बजे से देखा जा सकेगा और इसके लिए प्लैनिटेरियम ने खास तैयारियां की हैं.

घटा हुआ फासला

चांद की ये स्थिति पेरीजी फुल मून कहलाती है. जब चांद धरती से सबसे दूर होता है, उस स्थिति की तुलना में सुपरमून 14 प्रतिशत बड़ा और 30 प्रतिशत ज्यादा चमकदार दिखता है.

ब्रिटेन की रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी के डा. रॉबर्ट मैसी कहते हैं कि चांद की चमक से ज्यादा स्पष्ट उसका आकार होता है.

वैसे तो चांद और धरती के बीच यूं तो 384,000 किलोमीटर का फासला है लेकिन सुपरमून के दौरान, जब चांद सबसे बड़ा नजर आता है, तब वो धरती से 356,400 किलोमीटर की दूरी पर होगा.

डा. मैसी कहते हैं, "जब चांद धरती के सबसे नजदीक होता है और उस दिन पूर्णिमासी या न्यू मून हो, तब समुद्र में ज्वार बढ़ जाता है."

लेकिन वैज्ञानिक इस धारणा को खारिज करते हैं कि सुपरमून की वजह से लोग अजीबो-गरीब तरीके से बर्ताव करने लगते हैं या इससे प्राकृतिक आपदाएं आ सकती हैं.

चांद और धरती के बीच की दूरी बदलती रहती है क्योंकि चांद, गोल कक्षा की जगह अंडाकार कक्षा में घूमता है.

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