एक बड़े साइबर हमले का पर्दाफाश

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Image caption फ़्लेम मैलवेयर से सात देशों के 600 से अधिक निशानों पर हमले किए गए हैं

एक रूसी सुरक्षा कंपनी ने एक ऐसे जटिल साइबर हमले का पता लगाया है जिससे इसराइल और ईरान जैसे देशों के निजी आँकड़ों की चोरी की जा रही थी.

रूसी सुरक्षा कंपनी का कैस्पेरस्की लैब्स ने बीबीसी को बताया कि उन्हें लगता है कि फ्लेम नामक ये मैलवेयर या कंप्यूटर प्रोग्राम अगस्त 2010 से सक्रिय था.

कंपनी का कहना है कि ये एक सरकार प्रायोजित हमला हो सगता है मगर उन्हें अभी पता नहीं है कि इसके पीछे कौन है.

उन्होंने फ्लेम को अब तक का सबसे जटिल साइबर हमला बताया है.

इससे पहले स्टक्सनेट नामक एक मैलवेयर से ईरान के परमाणु तंत्र को निशाना बनाया गया था. एक और मैलवेयर – डुगु – चोरी के लिए नेटवर्कों में घुसबैठ कर रहा था.

कैस्पेरस्की के मुख्य मैलवेयर विशेषज्ञ विताली कामलुक के अनुसार इस नए हमले से किसी तरह की कोई हानि नहीं होती बल्कि ये हमला बड़ी मात्रा में संवेदनशील सूचनाओं को एकत्र करने के लिए किया गया था.

उन्होंने बताया,"किसी सिस्टम के संक्रमित होते ही फ़्लेम का जटिल काम शुरू हो जाता है जिसमें नेटवर्क पर होनेवाले काम की जासूसी करना, कंप्टर के स्क्रीन के चित्र लेना, ऑडियो बातचीत को रिकॉर्ड करना, कीबोर्ड पर नजर रखना जैसी चीज़ें शामिल हैं."

उन्होंने कहा कि 600 से अधिक निशानों पर हमले हुए जिनमें आम लोगों से लेकर व्यावसायिक स्थल, शिक्षण संस्थान और सरकारी सेवाएँ शामिल हैं.

‘सरकारी हमला’

विताली कामलुक ने बताया कि फ्लेम का आकार और प्रकार जैसा है उससे ऐसा नहीं लगता कि इसे किसी साधारण साइबर अपराधी ने बनाया होगा.

उन्होंने कहा,"अभी ऐसे मैलवेयर और स्पाइवेयर तीन तरह के लोग बनाते हैं, हैक्टिविस्ट, साइबर अपराधी और सरकारें.

"फ्लेम को बैंक एकांउटों से पैसे चुराने के लिए नहीं बनाया गया. ये दूसरे हैकिंग प्रोग्रामों से भी अलग है. ऐसे में साइबर अपराधियों और हैक्टिविस्टों को अलग कर दिया जाए तो हम इसी नतीजे पर पहुँचते हैं कि ये तीसरे गुट का ही काम हो सकता है."

इस हमले के शिकार देशों में ईरान, इसराइल, सूडान, सीरिया, लेबनान, सउदी अरब और मिस्र शामिल हैं.

इस मैलवेयर से कंप्यूटरों के माइक्रोफ़ोन से रिकॉर्डिंग भी हो सकती है और फिर उसे कम्प्रेस कर उसे हमलावर के पास दोबारा भी भेजा जा सकता है.

साथ ही ये स्क्रीन पर हो रही चीजों, जैसे मेल आदि के स्क्रीन शॉट लेकर उसे हमलावर तक पहुँचा सकता है.

ब्रिटेन की सरे युनिवर्सिटी के प्रोफेसर ऐलन वूडवर्ड का कहना है कि ये मैलवेयर एक औद्योगिक वैक्यूम क्लीनर की तरह काम करता है जो संवेदनशील सूचनाओं को सोख लेता है.

उन्होंने साथ ही इसे और अधिक गंभीर बताते हुए कहा कि स्टक्सनेट जहाँ केवल एक काम करने के इरादे से बनाया गया था, वहीं फ्लेम के साथ ऐसा नहीं है और इसके माध्यम से जो हाथ लगा उसे समेटा जा सकता है.

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