उदासी से मुक्ति दिला सकती है आयरन की गोलियां

Image caption सुस्ती में आयरन की दवा लाभदायक हो सकती है

स्वीट्जरलैंड के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि अगर लगातार थकान महसूस हो तो आयरन की गोली लाभदायक साबित हो सकती है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर शरीर में आयरन की कमी हो तो खून की बीमारी हो सकती है और इसके चलते सुस्ती, कमजोरी और कभी-कभी बेहोशी का दौरा भी पड़ सकता है.

कनाडियन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल में प्रकाशित 198 महिलाओं पर किए गए अध्ययन के अनुसार अगर महिलाओं को आयरन की दवा दी जाती है तो इसका लाभ सुस्ती भगाने में होता है.

अधिक दवा ठीक नहीं

हालांकि अध्ययन में अत्यधिक मात्रा में आयरन की गोली इस्तेमाल करने वालों को चेताया भी गया है. चेतावनी में कहा गया है कि अधिक मात्रा में आयरन न लें क्योंकि यह खतरनाक भी हो सकता है.

शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में 18 साल से 53 साल की महिलाओं पर शोध किया है जिसमें मासिक धर्म होता है. यह वही समय होता है जब महिलाओं के रक्त में आयरन की कमी होती है.

शोधकर्ताओं ने अपने विश्लेषण में कहा है कि सर्जरी से सुस्ती का इलाज संभव नहीं हो पा रहा था लेकिन उन्हें यह भी पता नहीं था कि आयरन की दवा खाने से उन महिलाओं को लाभ हो सकता है.

सुस्ती में कमी

शोधकर्ताओं ने अपने शोध में 200 महिलाओं को शामिल किया जिनमें सुस्ती की बीमारी थी. लेकिन उनमें से किसी का इलाज नहीं चल रहा था. उन दो सौ महिलाओं में से आधी महिलाओं को आयरन की गोली दी गई और बाकी आधी महिलाओं को डायबिटीज की दवा दी गई.

इस शोध को 12 हफ्ते तक चलाया गया और उसका रिकार्ड तैयार करके रखा गया.

शोध में शामिल स्विट्जरलैंड के लॉसेन विश्वविद्यालय के एक शोधकर्ता डॉक्टर बर्नाड फेवरेट ने कहा, “हमने जब रिकार्ड देखा तो पता चला कि पचास फीसदी महिलाओं की सुस्ती में कमी आई है.”

उनके अनुसार, “गर्भधारण कर सकने वाली महिलाओं में आयरन की कमी को लोगों ने समझा नहीं होगा, जिसके चलते सुस्ती दिखाई देती होगी. जिन महिलाओं में लंबे समय से सुस्ती है, उनको आयरन की दवा दी जानी चाहिए.”

हालांकि ब्रिटिश डाएटिक एसोसिएशन के प्रवक्ता राइक मिलर ने अधिक आयरन की दवा न लेने की सलाह देते हुए कहा है कि सुस्ती से पीड़ित लोगों को बहुत अधिक मात्रा में आयरन नहीं लेना चाहिए क्योंकि इससे किसी अंग पर गहरा असर हो सकता है.

कई कारण

राइक मिलर का कहना है, “सुस्ती की बीमारी कभी एक कारण से नहीं हो सकती है, इसके कई कारण होते हैं. जिसमें ज्यादा कसरत करने से लेकर व्यक्ति का खुराक और सोने की आदत भी शामिल है.”

उनका कहना है, “मैं यह नहीं कहता कि इस अध्ययन का कोई मतलब नहीं है लेकिन मेरा सुझाव है कि अध्ययन में सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए.”

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