ऑस्ट्रेलिया बनाएगा सबसे बड़ा सुरक्षित जल क्षेत्र

ऑस्ट्रेलिया ने कहा है कि वो रियो में होनेवाले संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण शिखर सम्मेलन से पहले समुद्री क्षेत्रों का दुनिया का सबसे बड़ा नेटवर्क तैयार करेगा.

इस रिज़र्व में समुद्र के 31 लाख वर्ग किलोमीटर के दायरे को शामिल किया जाएगा जिसमें कोरल सागर भी होगा.

ऑस्ट्रेलिया के जलक्षेत्र के एक तिहाई हिस्से से भी बड़े भूभाग में स्थित इस क्षेत्र में मछलियाँ पकड़ने और तेल व गैस की खोज पर पाबंदियाँ लगाई जाएँगी.

इस फैसले की घोषणा की ऑस्ट्रेलिया के पर्यावरण मंत्री टोनी बर्क ने जो कि अगसे सप्ताह ब्राज़ील के रियो शहर में होनेवाले पृथ्वी शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड के साथ हिस्सा लेंगे.

उन्होंने कहा,”समय आ गया है जब समुद्रों को बचाने के लिए नए कदम उठाए जाएँ, और आज ऑस्ट्रेलिया ने वो कदम उठाया है“ .

बीबीसी संवाददाता डंकन केनेडी का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया ने ये घोषणा रियो सम्मेलन को ध्यान में रखकर की है.

सम्मेलन का आधिकारिक नाम – रियो+20 पृथ्वी सम्मेलन रखा गया है.

इस शिखर सम्मेलन मे 130 से अधिक देशों के नेता एकत्र हो रहे हैं जो मिलकर पर्यावरण को बचाने के बारे में चर्चा करेंगे जिनमें सागर भी शामिल हैं.

अभी दुनिया का सबसे बड़ा सुरक्षित समुद्री क्षेत्र हिंद महासागर में चेगोस द्वीपों के पास स्थित है जिसे ब्रिटेन ने बनाया है. इसमें लगभग साढ़े पाँच लाख वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र आता है.

योजना

Image caption कोरल सागर में शार्क और टूना के अलावा समुद्री चट्टानें और गहरी घाटियाँ हैं

समुद्रों के बारे में ये योजनाएँ कई वर्षों से बन रही हैं जिनपर अंतिम चर्चा की प्रक्रिया के बाद ही बात आगे बढ़ेगी.

पिछले साल, ऑस्ट्रेलिया सरकार ने कोरल सागर में जलीय जीवन की रक्षा के लिए योजना की घोषणा की थी जो कि लगभग 10 लाख वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र है.

पूर्वोत्तर ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड प्रदेश से लगे कोरल सागर में शार्क और टूना मछलियाँ रहती हैं और इसमें उष्णकटिबंधीय समुद्री चट्टानें और गहरी समुद्री घाटियाँ स्थित हैं.

इस समुद्र में अमरीकी नौसेना के तीन जहाज़ भी हैं जो 1942 की कोरल सागर की लड़ाई में डूब गए थे.

समुद्रों के इस नेटवर्क में ग्रेट बैरियर रीफ़ भी होगा जिसे यूनेस्को ने वैश्विक धरोहर घोषित किया हुआ है.

इस योजना के तहत ऑस्ट्रेलिया के तटों के पास सुरक्षित समुद्री क्षेत्रों की संख्या बढ़कर 27 से 60 हो जाएगी.

मगर इस घोषणा से कार्यकर्ताओं और पर्यावरणवादी समूहों के संतुष्ट होने की संभावना कम ही है जो कि कोरल सागर में मछलियों के पकड़ने पर पूरी तरह से पाबंदी लगाए जाने की माँग करते हैं.

ऐसी ख़बरें हैं कि मछली उद्योग को इन पाबंदियों के बदले में क्षतिपूर्ति के तौर पर करोड़ों डॉलर दिए जाएँगे.

कुछ ये भी कह रहे हैं कि अभी भी कुछ सुरक्षित क्षेत्रों में तेल और गैस की खोज जारी रहेगी, ख़ास तौर पर पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के पास.

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