जुलाई में फिर अंतरिक्ष जाएँगी सुनीता विलियम्स

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Image caption जापान और रूस के साथी अंतरिक्षयात्रियों के साथ सुनीता विलियम्स

भारतीय मूल की अंतरिक्षयात्री सुनीता विलियम्स अगले महीने एक बार फिर अंतरिक्ष यात्रा पर जाएँगी जहाँ वे लंदन ओलंपिक के मौके पर एक खास अंतरिक्षीय खेल प्रयोग में भी हिस्सा लेंगी.

अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार विलियम्स 14 जुलाई को कज़ाख़स्तान के बाइकोनूर अंतरिक्ष केंद्र से एक रूसी और एक जापानी अंतरिक्ष यात्री के साथ अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए उड़ान भरेंगी.

सुनीता और उनके सहयोगी एक अतिव्यस्त समय में अंतरिक्ष स्टेशन जा रहे हैं जब वहाँ अंतरिक्षयात्रियों को दो बार अंतरिक्ष में स्पेसवॉक करना है, जापान, रूस, अमरीका के यानों को सामान लेकर जाना है और इसी दौरान वहाँ बड़े ज़ोर-शोर से प्रयोग होने हैं.

अपने आगामी अंतरिक्ष दौरे के विषय में सुनीता विलियम्स ने पत्रकारों से कहा,"इस बार हम अंतरिक्ष स्टेशन की पूर्ण क्षमताओं को देखेंगे...ये एक बहुत जटिल यान बन चुका है और मैं इसे समझने के लिए होनेवाले प्रयोग का हिस्सा बनने का इंतज़ार कर रही हूँ."

लंदन ओलंपिक को ध्यान में रखकर होनेवाले प्रयोग – स्प्रिंट – के विषय में सुनीता विलियम्स ने बताया कि ये अंतरिक्ष स्टेशन पर मौजूद यात्रियों के व्यायाम से जुड़ा प्रयोग है.

उन्होंने कहा,"इसमें ये समझने की कोशिश की जाएगी कि क्या तेज़ी से व्यायाम करना, लंबे समय तक व्यायाम करने का विकल्प हो सकता है. ये एक जटिल प्रयोग है जिसमें ये समझा जाएगा कि स्टेशन पर यात्रियों के हृदय पर क्या प्रभाव पड़ता है."

कीर्तिमान

46 वर्षीया सुनीता विलियम्स, कल्पना चावला के अलावा भारतीय मूल की दूसरी अंतरिक्ष यात्री हैं.

उनके नाम महिला अंतरिक्षयात्रियों के तीन कीर्तिमान दर्ज हैं.

वे अंतरिक्ष में सबसे लंबा समय - 195 दिन - व्यतीत करनेवाली महिला अंतरिक्षयात्री हैं.

वे सबसे अधिक - चार बार - स्पेसवॉक करनेवाली महिला यात्री हैं.

इसके अलावा सबसे लंबे समय तक – 29 घंटे 17 मिनट – स्पेसवॉक करने का कीर्तिमान भी उनके ही नाम है.

सुनीता के पिता गुजरात से हैं और उनकी माँ स्लोवेनिया की रहनेवाली हैं.

उन्होंने 1995 में फ़्लोरिडा इंस्टीच्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से मास्टर डिग्री हासिल की है.

नासा ने 1998 में उन्हें अंतरिक्षयात्रा के लिए चुना.

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