गर्भावस्था है किशोरियों में मौत का सबसे बड़ा कारण

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एक नई रिपोर्ट के मुताबिक किशोरियों में मौत का सबसे बड़ा कारण कम उम्र में उनका गर्भ धारण करना होता है. सेव द चिल्ड्रिन नाम की संस्था की रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रसव के दौरान संक्रमण या बीमारी के चलते 10 लाख किशोरियों की मौत हो जाती है या वे किसी न किसी रूप से जख्मी हो जाती हैं.

इस समस्या का सबसे बड़ा कारण गर्भनिरोधकों तक पहुँच न बन पाना बताया गया है.

दुनिया के बहुत से देशों में ये आम बात है कि लड़कियों की बहुत कम उम्र में शादी हो जाती है. शादी के बाद ही वे अकसर गर्भवती हो जाती हैं लेकिन शारीरिक रूप से वे बच्चा पैदा करने के लिए तैयार नहीं होती.

लाइबीरिया के एक गरीब इलाके की क्लिनिक में एक तिहाई नवजात शिशुओं की माताओं की उम्र 15 से 19 साल के बीच होती है. कुछ की आयु तो 13 साल तक भी होती है.

वहाँ सेव द चिल्ड्रन संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर जॉर्ज किजाना कहते हैं कि कम उम्र में माँ बनी इन लड़कियों में कई तरह की चिकित्सिक पेचीदगियाँ हो सकती हैं.

वे कहते हैं, "किशोरियों के शरीर तैयार नहीं होते. कम उम्र में प्रसव से कई तरह की शारीरिक दिक्कतें हो सकती हैं जिस कारण कई बार लड़कियों के परिवार इनसे किनारा कर लेते हैं. बच्चों की सेहत को भी खतरा रहता है. अगर माँ 18 साल से छोटी है तो बच्चे के मरने की आशंका बढ़ जाती है."

भारत के हालात

रिपोर्ट के मुताबिक विकासशील देशों में 40 प्रतिशत जन्म गैर-इरादतन होते हैं. क्या उन्हें बच्चा पैदा करना चाहिए या फिर कब या फिर कितने -- इन सवालों पर फैसला लेने वाली लाखों महिलाएं परिवार नियोजन की सुविधाएं ले ही नहीं पातीं.

बड़ी आबादी वाले देशों में, खास तौर पर दक्षिण एशिया में, ऐसा देखने में आता है. भारत में ऐसी 6.4 करोड़ महिलाएं हैं जबकि पाकिस्तान में 1.5 करोड़ और बांग्लादेश में एक करोड़ महिलाएं ऐसी हैं.

भारत में 15 से 19 साल के बीच 47 प्रतिशत लड़कियां सामान्य से कम वजन की हैं जबकि 56 प्रतिशत महिलाएं रक्त हीनता से पीड़ित हैं.

भारत में साल 2008 में हुए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि 15 से 24 साल के बीच उम्र की लड़कियों में आधी से ज्यादा ने कहा कि उन्हें कभी कोई यौन-शिक्षा नहीं मिली, 30 प्रतिशत लड़कियों को कंडोम की जानकारी नहीं थी और 77 % ने कहा कि उन्होंने कभी किसी से गर्भनिरोध के बारे में बात नहीं की.

कम उम्र में गर्भवती होने को बाल विवाह से जोड़ा जाता है. हर साल 18 वर्ष से कम उम्र की लगभग एक करोड़ लड़कियों की शादी होती है, यानी कि प्रतिदन औसतन 25,000 लड़कियां. भारत में 15 से 19 साल के बीच शादी होने वालों की संख्या 30 प्रतिशत है. इस उम्र में शादी करने वाले लड़कों की संख्या केवल 5 % है.

भारत में हुए सर्वेक्षणों मे पाया गया कि वर्तमान में शादीशुदा महिलाओं में हर पांच में से एक महिला ही अपने पति के साथ परिवार नियोजन की चर्चा करती हैं.

परिवार नियोजन का विरोध

गर्भनिरोधक प्रोग्राम कई सालों से चल रहे हैं लेकिन पैसे और समर्थन की कमी रहती है. धार्मिक कारणों के चलते कई देशों में कुछ लोग इसका विरोध करते आए हैं.

अब अगले महीने लंदन में परिवार नियोजन सम्मेलन हो रहा है जहाँ दुनिया भर से नेता आएँगे. इसका आयोजन गेट्स फाउंडेशन और ब्रितानी सरकार कर रही है.

माना जा रहा है कि इस सम्मेलन में कहा जाएगा कि न सिर्फ गर्भनियोजन के साधन लड़कियों को उपलब्ध करवाए जाएँ बल्कि उन्हें और उनके परिवार को शिक्षित किया जाए और समझाया जाए कि थोड़ी बड़ी उम्र में माँ बनने के क्या फायदे हैं.

चैरिटी संस्थाओं का कहना है कि ऐसा करने से कई फायदे हो सकते हैं क्योंकि अवांछित गर्भ धारण की वजह से होने वाली चिकित्सय दिक्कतों पर काफी पैसा खर्च होता है.