जब वैज्ञानिकों ने 3-डी में संक्रमण को फैलते देखा..

शरीर में जब संक्रमण फैलता है तो ये किस तरह का दिखाई देता है? ये किस तरह से शरीर पर अपना कब्जा करता है और वो स्थितियाँ कौन सी होती हैं जब शरीर की प्रतिरोधक क्षमता संक्रमण पर प्रहार कर उसे अप्रभावी बना देती हैं?

पहली बार लंदन के इंपीरियल कालेज के सेंटर फॉर मॉलिक्यूलर बैक्टीरियोलॉजी एंड इन्फेक्शन के वैज्ञानिकों ने एक स्कैन करने वाले उपकरण का इस्तेमाल कर ये देखने की कोशिश की है कि पशु में किस तरह और कितने समय में संक्रमण फैलता है.

प्रोफेसर गादी फ्रैंकेल ने जब पहली बार स्कैन को देखा तो उनके पहले शब्द यही थे," क्या खूब, इससे हमें पहली बार संक्रमण 3-डी में और वास्तविक समय में देखने को मिला"

इस स्कैन में दिखाई दिया कि किस तरह से जीवाणु यानि बैक्टीरिया चूहे की छोटी आंत को संक्रमित कर रहा है. उसके बाद ये पाचन तंत्र के छोटे से हिस्से पर अपना असर छोड़ता है . इसके बाद जीवाणु भारी तादाद में हमला करते है और पूरी बड़ी आंत में फैल जाते हैं.

बाद के स्कैन में दिखाई देता है कि जीवाणुओं के इस हमले के बाद शरीर का प्रतिरोधक तंत्र किस तरह से इन जीवाणुओं से लड़ता है और इनका सफाया करने लगता है.

बैक्टीरिया की रोशनी

शोधकर्ता वैज्ञानिकों ने इस परीक्षण के लिए रोशनी पैदा करने वाले अनुवांशिक रुप से संवर्धित माउस बग का इस्तेमाल किया.

इस प्रयोग के लिए चूहे के शरीर का एक ऐसा खाका तैयार किया गया ताकि शरीर में जीवाणु की मौजूदगी की एकदम सटीक जानकारी मिल सके.

रोशनी की तीव्रता से ये पता चला कि शरीर के उस हिस्से में कितने जीवाणु मौजूद हैं. जितनी ज्यादा रोशनी उतने ज्यादा जीवाणु... और रोशनी के कम होने का मतलब कि जीवाणु मर रहे हैं.

हर दिन इन स्कैनों पर नजर रखी गई और बाद में उन्हें जोड़ कर एक पूरी त्रिआयामी फिल्म बना दी गई.

प्रोफेसर फ्रैंकेल की प्रयोगशाला में काम करने वाले डॉ. जेम्स कॉलिन कहते हैं," हम कल्पना कर सकते हैं कि जीवाणु कहां पर हैं और किस तरह प्रतिरोधी कोशिकाएं उनसे लड़ रही हैं."

क्रांति

प्रोफेसर फ्रैंकेल का कहना है कि इससे जीवाणु संक्रमण पर किए जाने वाले शोध में क्रांति आ जाएगी और ये ही भविष्य है.

प्रोफेसर फ्रैंकेल कहते हैं," अब हम इसकी मदद से ये जान पाएंगे कि कैसे एक जिंदा पशु में जीवाणु रोधी वैक्सीनेशन काम करता है,ये कुछ ऐसा है जो कि पहले कभी नही हुआ."

प्रोफेसर फ्रैंकेल को उम्मीद है कि इस तकनीकि से मेडिसन की दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण कुछ मुद्दों के समाधान में मदद मिलेगी. साथ ही भविष्य में बीमारियों से लड़ने वाले बेहतर टीके बनाने में भी ये कारगर सिद्ध होगी.

संबंधित समाचार