प्यारे कैंसर, मैंने आज तुम्हें हरा दिया

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Image caption विकी फोर्स्टर को उम्मीद है कि उनके शोध से कैंसर की रोकथाम और इलाज में मदद मिलेगी.

“प्यारे कैंसर, मैंने तुम्हें सात साल की उम्र में हरा दिया था और आज मैंने कैंसर रिसर्च में अपनी पीएचडी की है. अब क्या कहते हो.”

इंग्लैंड के एसेक्स शहर की 25 वर्षीय विकी फोर्स्टर ने 22 जून को अपने इस ट्विट से न केवल अपनी पीएचडी पूरी होने की घोषणा की बल्कि ल्यूकेमिया के ख़िलाफ़ 18 साल पहले जीत का जश्न भी पूरा किया.

विकी सात साल की उम्र में कैंसर का शिकार हो गईं. ढाई साल तक उनका इलाज चला. ये वो दौर था जिसकी खट्टी और मीठी यादें अब तक उनके जीवन का हिस्सा हैं.

बीबीसी की ब्राजील सेवा को विकी ने बताया, “ज्यादातर यादें तो अच्छी ही हैं जिनका श्रेय मेरा इलाज करने वाले डॉक्टरों और नर्सों को जाता है. लेकिन मैंने ये भी देखा कि मेरे वार्ड में कुछ दोस्तों की कैंसर से मौत हो गई थी. मेरा पांच साल का एक दोस्त था जिसे फेफड़ों का कैसर था. और एक दिन मैं वार्ड में पहुची तो वो हम सबको छोड़ कर जा चुका था.”

इसी अनुभव ने विकी की पेशेवर जिंदगी को आकार दिया. बचपन में उनकी विज्ञान और रसायन शास्त्र में बहुत दिलचस्पी थी. वो सात साल की उम्र में घंटों तक अपने डॉक्टर के साथ बात करके अपनी बीमारी को समझने की कोशिश करती थीं.

विकी ये भी पूछती थीं कि जिन दवाओं को वो खा रही हैं, उनका क्या असर हो रहा है.

वो बताती हैं, “इस जानकारी ने जीवविज्ञान में मेरी रुचि पैदा की और फिर आगे रिसर्च के लिए प्रेरित किया.”

शोध

विकी ने बायोमेडिकल साइंस में डिग्री और पीएचडी की है. जैसे ही उन्होंने ट्विटर पर अपनी पीएचडी की जानकारी दी तो इंटरनेट पर लोग इसके दीवाने हो गए.

वो न्यूकासल यूनिवर्सिटी के इंस्टिट्यूट ऑफ रिसर्च में अपनी पढ़ाई जारी रखेंगी और वे इसके लिए छात्रवृत्ति चाहती हैं.

विकी को उम्मीद है कि उनके शोध से ल्यूकेमिया की रोकथाम और इलाज में मदद मिलेगी. अपने शोध के दौरान विकी ने अपना ज्यादातर वक्त प्रयोगशाला में गुजारा लेकिन वो अपने मरीजों के संपर्क में भी बराबर रहती थीं.

विकी बताती हैं, “ट्विटर पर मेरे संदेश के जवाब में आठ या दस संदेश उन परिवारों के आए जो कैंसर से पीड़ित हैं.

उन्होंने कहा, ‘अपनी कहानी साझा करने के लिए शुक्रिया’ और ये इस बात का प्रमाण है कि कैंसर के बाद भई सामान्य जीवन जिया जा सकता है.”

ट्वीट

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Image caption विकी फोर्स्टर को सात की उम्र में कैंसर ने घेर लिया था.

फोर्स्टर की ट्विट को हज़ारों लोगों ने दोबारा ट्विट किया और इसके कई अनुवाद भी किए गए.

एक व्यक्ति का कहना था, ''पीएचडी के लिए बधाई. मेरे बेटे को भी ल्यूकेमिया है और आप उसके लिए प्रेरणादायी हैं.

अपने काम में विकी दूसरा तरीका अपनाती हैं.

वो कहती हैं. ‘‘ दुनिया में जितने भी लोग मेरे साथ काम कर रहे हैं या कैंसर पर रिसर्च कर रहे हैं उनके पास अपने कारण हैं करियर चुनने के. कई लोगों को कैसंर रहा है और कुछ लोग हारे भी हैं. मेरी कहानी बस एक कहानी भर है.’’

मुझे खुशी होगी कि मेरा मूल्यांकन मेरे काम के स्तर के आधार पर हो रहा है. मेरा अनुभव मुझे कोई बेहतर नहीं बना देता.

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