एचआईवी से बचाने वाली दवा

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Image caption इस दवा को ब्रिटेन एचआईवी के इलाज के लिए उपयोग की अनुमति देता है न कि उसके बचाव के लिए

अभी तक दुनिया भर में एचआईवी और एड्स के लड़ने की जद्दोजहद चल रही है और शोध चल रहे हैं कि इसका इलाज किस तरह से किया जाए.

ये सब एचआईवी संक्रमण के बाद की बाते हैं.

लेकिन इस बीच अब एक ऐसी दवा आ गई है जो एचआईवी संक्रमण को रोकती है.

अमरीकी स्वास्थ्य नियामक संस्था ने पहली बार एक ऐसी दवा को अनुमति दे दी है जो एचआईवी के संक्रमण को रोकती है.

शोध कहता है कि हर रोज़ एक गोली खाने से एचआईवी संक्रमण का खतरा 73 प्रतिशत तक कम हो सकता है.

फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफ़डीए) ने कहा है कि त्रुवादा नाम की ये दवा उन लोगों को दी जा सकती है जिन्हें एचआईवी संक्रमण का खतरा बहुत अधिक है या ऐसे लोगों को जिन्हें एचआईवी संक्रमित व्यक्ति से यौन संबंध बनाने की स्थिति बन सकती है.

विरोध भी

कुछ स्वास्थ्य कर्मियों और एचआईवी प्रभावित लोगों के बीच काम कर रही संस्थाओं ने इस दवा को अनुमति दिए जाने का विरोध किया है.

उनका कहना है कि ऐसी दवा से एचआईवी से रक्षा की एक झूठी सुरक्षा की भावना पैदा होगी और इससे ये होगा कि लोग ज्यादा खतरा उठाने लगेंगे.

उन्हें यह डर भी है कि एचआईवी का एक वायरस भी पैदा हो सकता है जिसमें इस दवा के प्रतिरोध की क्षमता हो. यानी एक समय के बाद इस दवा का असर होना बंद हो जाए.

एफडीए ने एक बयान में कहा है कि इस दवा का उपयोग 'व्यापक एचआईवी बचाव योजना' के तहत की प्रयोग में लाया जाना चाहिए जिसमें कंडोम का प्रयोग और नियमित एचआईवी परीक्षण शामिल है.

मई में स्वास्थ्य विशेषज्ञों की एक सलाहकार समिति ने एडीए से इस दवा को अनुमति देने की सिफ़ारिश की थी.

'दूसरी दवाओं के साथ लें'

एएफ़डी ने कहा है कि जो लोग पहले से एचआईवी संक्रमित हैं, उन्हें ये दवा एंटीरेट्रोवायरल दवाओं के साथ लेना चाहिए.

वर्ष 2010 में किए गए प्रयोग से पता चला है कि ट्रूवाडा ने समलैंगिक पुरुषों में एचआईवी की आशंका को 44 प्रतिशत और किसी एचआईवी संक्रमण से मुक्त व्यक्ति के एचआईवी प्रभावित विषमलिंगी व्यक्ति से यौन संबंध बनाने पर संक्रमण की आशंका को 73 प्रतिशत तक कम कर दिया.

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Image caption एचआईवी संक्रमण के बाद के इलाज के लिए कई दवाएँ पहले से ही बाजार में हैं

संयुक्त राष्ट्र एड्स कार्यक्रम यूएनएड्स के माइकल बॉर्टन ने कहा कि इस बात के सबूत हैं कि ये दवा एचआईवी संक्रमण के खतरे को कम करती है लेकिन तभी जबकि इसका नियमित सेवन किया जाए.

उनका कहना है कि ज्यादातर मामलों में अच्छा ये होगा कि एचआईवी से प्रभावित व्यक्ति का इलाज किया जाए न कि उसके उस पार्टनर पर ध्यान दिया जाए जिसे एचआईवी नहीं है.

उनका कहना है, "हम जानते हैं कि एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति यदि नियमित रूप से एंटीरेट्रोवायरल दवा लेता रहे तो उसका वायरस इतना कमज़ोर हो जाता है कि वह किसी और को संक्रमित लायक ही नहीं बचता."

एंटीरेट्रोवायरल दवा एचआईवी संक्रमित व्यक्ति की जीवन अवधि भी बढ़ा देती है.

ट्रुवाडा को ब्रिटेन में भी अनुमति दी गई है लेकिन एचआईवी के इलाज के लिए न कि उससे बचाव के लिए.