औरतों में 'डिज़ाइनर योनि' की बढ़ती चाहत

Image caption डिजाइनर योनि के लिए महिलाओं में सर्जरी का चलन बढ़ा है

ब्रिटेन की एक शोध संस्था ने एक एनीमेटेड फिल्म बनाई है और उसे उम्मीद है कि ये फिल्म महिलाओं में “डिजाइनर योनि” की इच्छा के बारे में बहस को प्रोत्साहित करेगी.

सेंटरफोल्ड नामक इस फिल्म में वेलकम ट्रस्ट ने पैसा लगाया है और इसमें ये दिखाया गया है कि तीन महिलाएं लेबियाप्लास्टी के बारे में चर्चा कर रही हैं कि इसने उन्हें किस तरह से प्रभावित किया है.

लेबियाप्लास्टी वह विधि है जिसमें ऑपरेशन के जरिए मादा जननांग यानी लेबिया के आंतरिक हिस्से को कम कर दिया जाता है.

पिछले साल राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा यानी एनएचएस की ओर से दो हजार से भी ज्यादा लेबियाप्लास्टी के ऑपरेशन किए गए जबकि पिछले पांच सालों में इसमें पांच गुने की बढ़ोत्तरी हुई है.

जानकारों का कहना है कि यदि अनियंत्रित निजी क्षेत्र में होने वाले इस ऑपरेशन को भी शामिल कर लिया जाए तो ये संख्या कहीं ज्यादा होगी जहां इसकी लागत तीन हजार पौंड से अधिक की आती है.

लेबियाप्लेस्टी मामलों में हो रही लगातार बढ़ोत्तरी के बावजूद एनएचएस की ओर लेबिया के आकार-प्रकार के बारे में किसी तरह के सामान्य दिशा-निर्देश नहीं तय किए गए हैं.

व्यग्र करने वाले सपने

शोधकर्ताओं का कहना है कि इसके दूरगामी प्रभावों के बारे में अभी बहुत कम पता है और महिलाओं को सर्जरी से पहले किसी तरह का मनोवैज्ञानिक समर्थन नहीं मिल पा रहा है.

जेसी कहती हैं कि वो अपने लेबिया जैसी महिलाओं की तलाश में घंटों पत्रिकाओं के पन्ने पलटती रहती थीं, लेकिन उन्हें ऐसी कोई महिला नहीं मिली जिसके लेबिया बिल्कुल उसकी तरह हों.

Image caption कुछ महिलाएं योनि के आकार-प्रकार के बारे में अजीबोगरीब सपने देखती हैं

उन्होंने कहा, “ये इस बात का एक और प्रमाण था कि उनके साथ कुछ गलत है.”

वो सपना देखती थीं कि उनके लेबिया की त्वचा इस तरह होगी मानो एक दुपट्टा गर्दन को पूरी तरह से लपेटे हो. चारों ओर से लोग उसे देख रहे हैं और इशारा करते हुए हँस रहे हैं.

वो कहती हैं, “ऑपरेशन के कुछ ही समय बाद मैंने सपना देखा कि मेरी त्वचा फिर बढ़ गई है और मैं चौंक कर उठ गई.”

एक साल के बाद, सपना देखना बंद हो गया. उनका कहना था कि इसके बारे में बात करना उन्हें बचकाना लगने लगा. लेकिन ये उनकी दैनिक व्यग्रता को बढ़ाने के लिए पर्याप्त था.

हीन भाव

एम्मा का भी मानना था कि उनका लेबिया का हिस्सा असामान्य था. वो कहती हैं, “सर्जरी से पहले लेबिया की त्वचा काफी लंबी, गहरे रंग वाली, गंदी और झुर्रीदार थी.”

वो कहती हैं, “मेरे जीवन में यही एक चीज थी जिसे लेकर मैं परेशान रहती थी. लेबियाप्लास्टी को लेकर मैं बहुत उत्साहित थी. मैंने सोचा कि इससे तो मेरी सारी समस्याएं ही खत्म होने वाली हैं. मुझे लगा कि अब मैं बहुत प्यारी लगूंगी, बिल्कुल एक छोटे डिजाइनर योनि की तरह.”

हालांकि एम्मा के जननांगों की त्वचा अब काफी छोटी है, लेकिन वो इससे खुश नहीं हैं.

लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज हॉस्पिटल के मनोवैज्ञानिक डॉक्टर लीह मी लियाओ कहते हैं कि लेबियाप्लास्टी कराने वाली महिलाओं को इस बारे में चर्चा के लिए ज्यादा वक्त मिलना चाहिए.

वो कहते हैं, “दरअसल जननांगों की त्वचा से जुड़ा ये मामला मनोवैज्ञानिक है. जब कोई महिला ये कहती है कि वो इसे लेकर चिंतित है तो सर्जन को इसमें जननांगों की त्वचा सुनाई पड़ती है और वो इसका ऑपरेशन कर देता है, जबकि मुझे इसमें उनकी चिंता सुनाई पड़ती है.”

वो कहती हैं कि इस मामले में महिलाओं को मनोवैज्ञानिक उतनी आसानी से नहीं मिल पाते हैं जबकि सर्जरी के लिए आसानी से मिल जाते हैं.

देखरेख के तरीके

ब्रिटेन के प्लास्टिक सर्जनों का एक संगठन इस सर्जरी से पहले मनोवैज्ञानिक काउंसिलिंग की मांग कर रहा है.

इस संगठन का कहना है कि इस सर्जरी से पहले महज 35 प्रतिशत अस्पतालों में ही मनोवैज्ञानिक सलाह की सुविधा है.

डॉ लियो कहती हैं कि सर्जरी भी एक अहम तरीका है लेकिन इसे अंतिम हल के रूप में ही आजमाना चाहिए.

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सारा क्रेफ्टन कहती हैं कि उनके क्लीनिक में तो 11 वर्ष तक की बच्चियां आती हैं जो कि सर्जरी की इच्छुक हैं.

उनका मानना है कि हालांकि असामान्य लेबिया वाली महिलाओं का प्रतिशत बहुत कम है लेकिन लेकिन ज्यादातर महिलाओं की चिंता ये होती है कि लेबिया का सही साइज क्या होना चहिए.

डॉक्टर क्रेफ्टन कहती हैं कि सर्जरी के चक्कर में लेबिया बाहर ज्यादा दिखने लगता है, और ज्यादातर महिलाओं के सर्जरी कराने की वजह भी यही है.

वो कहती हैं, “हमें क्या करना चाहिए...हम सर्जरी के विकल्प को तलाश रहे हैं ताकि महिलाओं को पास और भी विकल्प रहें, बजाय इसके कि वो ऑपरेशन कराएं जिसके बारे में वो कुछ भी नहीं जानतीं.”