क्यों कठिन है राह फेसबुक की...

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इस साल की शुरुआत में जब फेसबुक ने अपने शेयरों की पेशकश यानी आईपीओ को बाज़ार में उतारा तो उसकी कीमत 100 अरब डॉलर से भी ज़्यादा आंकी गई थी.

धूमधड़ाके से हुई इस शुरुआत का जश्न अब फेसबुक के लिए फीका पड़ता जा रहा है. इस शेयर की कीमत 38 डॉलर से शुरु हुई और फेसबुक का शेयर गिरते-गिरते 29 डॉलर प्रति शेयर पर पहुंच गया.

फेसबुक इस बात की आशंका पहले ही जाहिर कर चुका है कि उसे अपने मोबाइल यूज़र्स के ज़रिए पैसा कमाने में खासी दिक्कतें आ सकती हैं.

मोबाइल धारक विज्ञापनों को तरजीह नहीं देते और मोबाइल के लिए एप्लिकेशन बनाने वाले मैलकॉम बार्कले कहते हैं कि मोबाइल पर विज्ञापनों से धन कमाने के लिए फेसबुक को मोबाइल पर अपनी सुविधाएं चुस्त करनी होंगीं.

सबसे ज़रूरी है एचटीएमएल से अपनी तकनीक को स्थानांतरित करना जिसके प्रयास अब फेसबुक ने शुरु कर दिए हैं. लेकिन फेसबुक के आगे और भी कई चुनौतियां हैं

गोपनीयता - जेनिफर लिंच

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Image caption 38 डॉलर प्रति शेयर की शुरुआती कीमत से फेसबुक अब 29 डॉलर प्रति शेयर पर पहुंच गया है.

'इलेक्ट्रानिक्स फ्रंटीयर फाउंडेशन' की सदस्य जेनिफर लिंच निजता और गोपनीयता के मुद्दे पर लंबे समय से काम रही हैं. वो कहती हैं कि फेसबुक ने हाल ही में चेहरों को पहचानने वाले सॉफ्टवेयर 'फेस डॉटकॉम' को खरीदा है. इससे गोपनियता और निजता को लेकर दो अहम सवाल खड़े होते हैं.

'फेस डॉटकॉम' के पास 30 अरब से ज़्यादा लोगों के चेहरों का डाटा मौजूद है. फिलहाल फेसबुक ने ये जानकारी साझा नहीं की है कि वो इन आंकड़ों को किस तरह इस्तेमाल करेगा.

अगर फेसबुक पर मौजूद लोगों और उनकी तस्वीरों को 'फेस डॉटकॉम' की जानकारियों के साथ मिला दिया जाता है तो ये विश्व में इंसानी चेहरों के नमूनों का सबसे बड़ा 'डाटा बैंक' होगा.

गोपनीयता और निजता के लिहाज़ से ये चिंता का विषय है. जो सरकारें लोगों और उनकी निजी जानकारियों के बारे में ज्यादा से ज्यादा आंकड़े जमा करना चाहती हैं उनके लिए इस तरह के आंकड़े बहुमूल्य हैं.

दूसरा सवाल ये है कि अगर फेसबुक इस फीचर को मोबाइल उपकरणों से जोड़ कर और अधिक तस्वीरें इकट्ठा करने की कोशिश करता है तो सुरक्षा के लिहाज़ से इसके विपरीत परिणाम हो सकते हैं.

Image caption फेसबुक से जुड़े कई एप्लिकेशन जानकारियां चुराने और धोखाधड़ी का पर्याय भी बन चुके हैं.

इस दिशा में कोई भी कदम बढ़ाने से पहले फेसबुक को आश्वस्त होना होगा कि उसके पास इस जानकारी को संभालने और खातों में मौजूद जानकारी को हैकरों से बचाने के इंतजाम हैं.

सुरक्षा - ग्राहम क्लूले

तकनीक और सुरक्षा जैसे मसलों पर अनुसंधान करने वाले ग्राहम क्लूले का मानना है कि फेसबुक को अपना भविष्य सुरक्षित करने के लिए सुरक्षा के सवाल पर मुस्तैद होना होगा.

इंटरनेट और बाज़ार में इन दिनों फेसबुक से जुड़े कई तरह के ऐप मौजूद हैं लेकिन उन्हें अपने खातों से जोड़ते ही हम अपनी पूरी जानकारी सार्वजनिक कर देते हैं. इस तरह के कई एप्लिकेशन जानकारियां चुराने और धोखाधड़ी का पर्याय भी बन चुके हैं.

फेसबुक को अपनी बढ़ती लोकप्रियता के चलते सामने आए इन एप्लिकेशन पर भी नियंत्रण करना होगा. अपने यूज़र्स के खातों को सुरक्षित बनाने के लिए उसे जल्द से जल्द कोई प्रणाली विकसित करनी होगी.

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Image caption मोबाइल बाज़ार में उतरने के लिए फेसबुक को एंड्रॉएड और आई-फोन से मुकाबला करना होगा.

साथ ही लोगों को भी व्यापक स्तर पर यह सीखना होगा कि किस तरह की जानकारियां फेसबुक पर डाली जाएं और किस तरह की नहीं.

'फेसबुक-फोन' - कैरोलीना मिलानेसी

कई लोगों का मानना है कि फेसबुक अपना खुद का एक उपकरण बनाने की दिशा में काम कर रहा है. फेसबुक-फोन से जुड़ी अफवाहों के बाद मोबाइल कंपनी एचटीसी ने अपने की-पैड पर फेसबुक को जगह दी.

हालांकि बाज़ार में उतारे गए ये दोनों ही मॉडल एचटीसी ‘सालसा’ और एचटीसी ‘चाचा’ कोई कमाल नहीं दिखा पाए.

जानकार कैरोलीना मिलानेसी का मानना है कि ये सही है कि अब ज्यादा से ज्यादा मोबाइल उपभोक्ता सोशल मीडिया से जुड़ना चाहते हैं लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होंगे जो पूरी तरह सोशल मीडिया पर आधारित फोन खरीदना चाहेंगे.

मोबाइल बाज़ार में उतरने के लिए फेसबुक को मौजूद उच्च तकनीक एंड्रॉएड और आई-फोन से मुकाबला करना होगा जो बेहद खर्चीला सौदा है.

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